पुलिस की अनदेखी ने महिला को आग लगाने पर किया मजबूर! रेप की शिकायत लेकर काट रही थी चक्कर, अब PGI में जिंदगी-मौत की जंग

Punjab News: जीरकपुर के बाल्टन चौकी के बाहर मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। रेप की शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों से पुलिस के चक्कर काट रही एक महिला ने कथित तौर पर सिस्टम की बेरुखी से तंग आकर आत्मदाह का प्रयास किया। महिला की हालत बेहद नाजुक है और वह करीब 70 फीसदी तक झुलस गई है। उसे प्राथमिक उपचार के बाद चंडीगढ़ PGI रेफर किया गया है। पुलिस की इस कथित लापरवाही ने पूरे महकमे को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

रेप की शिकायत पर FIR दर्ज करने में टालमटोल

पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि महिला पिछले कई दिनों से दुष्कर्म की शिकायत लेकर चौकी आ रही थी, लेकिन अधिकारी उसे बार-बार टरका रहे थे। मंगलवार को जब वह अपने भाई के साथ दोबारा पहुंची, तो आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने मदद करने के बजाय उन्हें डांटकर वहां से भगा दिया। इसी निराशा और अपमान के चलते महिला ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली।

PGI चंडीगढ़ में 70 फीसदी झुलसी महिला की हालत गंभीर

जैसे ही महिला ने खुद को आग लगाई, चौकी के बाहर चीख-पुकार मच गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में आग बुझाई और उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक महिला की स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है। उसके शरीर का बड़ा हिस्सा जल चुका है। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में अब पुलिस ने रेप की FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाला मोर्चा, एसपी करेंगे जांच

एसएसपी हरमंदीप सिंह हंस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एसपी रैंक के अधिकारी को सौंप दी है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर इतने दिनों तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। एसएसपी ने आश्वासन दिया है कि आत्मदाह के प्रयास और रेप, दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच होगी। पुलिस अब चौकी के CCTV फुटेज खंगाल रही है ताकि परिजनों के आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

उपायुक्त ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मामले ने तूल पकड़ा तो उपायुक्त कोमल मित्तल ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने एसएसपी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी स्तर पर पुलिस कर्मियों की लापरवाही या संवेदनहीनता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। डीसी ने सिविल सर्जन को पीड़िता के इलाज की निगरानी करने को कहा है। सरकार ने पीड़िता को हर संभव चिकित्सा सहायता बिना किसी देरी के उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

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