हल्द्वानी में खौफ का साया: शादी से लौट रहे युवक को बाघ ने उतारा मौत के घाट, इलाके में भारी आक्रोश

Uttarakhand News: नैनीताल जिले के हल्द्वानी में आदमखोर बाघ का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। फतेहपुर रेंज के भदूनी गांव में गुरुवार देर रात एक बाघ ने शादी समारोह से घर लौट रहे युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। इस दर्दनाक घटना में 30 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई। नैनीताल जिले में पिछले दो दिनों के भीतर वन्यजीव के हमले में यह दूसरी मौत है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत और गुस्से का माहौल बना हुआ है।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं

जानकारी के अनुसार, भदूनी गांव निवासी कमल सिंह (30) गुरुवार रात एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। देर रात जब वह घर वापस लौट रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। बाघ युवक को घसीटते हुए पास के खेतों में ले गया। शुक्रवार सुबह जब ग्रामीणों ने युवक का क्षत-विक्षत शव देखा, तो इलाके में कोहराम मच गया। खुशियों वाले घर में अचानक मातम पसर गया है।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

क्षेत्र में लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है। कांग्रेस प्रवक्ता नीरज तिवारी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार और विभाग को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि यह महीने की तीसरी बड़ी घटना है, जो विभाग की विफलता को दर्शाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग केवल कागजी कार्यवाही कर रहा है, जबकि लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

दहशत के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण

फतेहपुर और आसपास की रेंजों में बाघ की सक्रियता ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। पूर्व में दी गई चेतावनियों के बावजूद बाघ को पकड़ने या उसे आदमखोर घोषित करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए। प्रशासनिक लापरवाही के कारण अब तक कई परिवार उजड़ चुके हैं। ग्रामीणों ने अब बाघ को तुरंत पकड़ने या मारने के आदेश जारी करने की मांग की है।

2026 में अब तक हुए घातक हमले

साल 2026 की शुरुआत से ही नैनीताल जिले में बाघों का तांडव जारी है। जनवरी में सुखिया देवी और अभिमन्यु की जान गई, जबकि फरवरी में गंगा देवी और कमला फर्त्याल बाघ का शिकार बनीं। अप्रैल महीने में ही हंसी देवी और हेमा देवी की मौत के बाद अब कमल सिंह की जान चली गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो यह सिलसिला थमने के बजाय और भी खौफनाक होता जा रहा है।

प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ बढ़ता गुस्सा

लगातार हो रही इन मौतों से स्थानीय जनता का सब्र अब जवाब दे रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार वन्यजीवों के संरक्षण की बात तो करती है, लेकिन इंसानी जान की कीमत शून्य हो गई है। भदूनी गांव की इस घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी दी है। जब तक आदमखोर बाघ को पिंजरे में कैद नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में शांति बहाल होना नामुमकिन नजर आ रहा है।

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