West Bengal News: पश्चिम बंगाल के बिधाननगर अंतर्गत सॉल्ट लेक इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला राजनीतिक मामला सामने आया है। यहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक बंद दफ्तर का ताला खुलते ही भारी मात्रा में लावारिस आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे सूबे की सियासत में भारी उबाल आ गया है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस दफ्तर में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए अपना ताला जड़ दिया था।
पुलिस ने सभी दस्तावेजों को किया सीज, स्थानीय लोगों ने दी सफाई
दफ्तर का ताला खोले जाने के बाद मौके पर पहुंची बिधाननगर नॉर्थ थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी पहचान पत्रों को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस प्रशासन ने इन सभी सरकारी दस्तावेजों को कानूनी तौर पर सीज कर अपनी जांच आगे बढ़ा दी है। दूसरी तरफ, इलाके के स्थानीय निवासियों ने इस पूरे विवाद पर एक अलग दावा किया है। उनका कहना है कि टीएमसी कार्यालय से बरामद किए गए सभी आधार कार्ड वास्तव में इसी क्षेत्र के आम नागरिकों के ही हैं।
पार्टी कार्यालय को बनाया था संपर्क केंद्र, नागरिकों की अपनी दलीलें
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस घनी आबादी वाले क्षेत्र के कई गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों ने अपने नए आधार कार्ड के लिए आवेदन करते समय एक बड़ी व्यावहारिक समस्या का सामना किया था। सरकारी डाक समय पर न मिलने के डर से उन्होंने टीएमसी के इस स्थानीय पार्टी दफ्तर के पते को एक आधिकारिक संपर्क केंद्र (कम्युनिकेशन एड्रेस) के तौर पर इस्तेमाल किया था। इसी वजह से पोस्टमैन ने ये सारे महत्वपूर्ण दस्तावेज सीधे पार्टी कार्यालय में लाकर जमा कर दिए थे।
सॉल्ट लेक के पार्क के बाहर भी मिले थे अन्य राज्यों के लावारिस कार्ड
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बीते वर्ष 2025 के दौरान मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान चलाया जा रहा था। इस विशेष अभियान के बीच भी कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित एक सार्वजनिक पार्क के ठीक बाहर कई आधार कार्ड लावारिस और संदिग्ध हालत में सड़क किनारे बिखरे मिले थे। सुबह की सैर पर निकले स्थानीय जॉगर्स ने बीए-सीए खेल के मैदान के पास इन लावारिस राष्ट्रीय पहचान पत्रों को देखा था, जिससे भारी सुरक्षा चूक की आशंका पैदा हो गई थी।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के पते दर्ज होने से गहराया रहस्य
पार्क के किनारे बरामद हुए इन लावारिस कार्डों की जांच करने पर एक नया और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। इन सभी दस्तावेजों पर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे दूरदराज के राज्यों के स्थायी पते दर्ज थे। स्थानीय नागरिकों ने इस सुरक्षा चूक की तत्काल सूचना नजदीकी पुलिस थाने को दी थी। इसके बाद बिधाननगर नॉर्थ पुलिस की एक विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर उन सभी लावारिस पहचान पत्रों को सुरक्षित बरामद कर लिया था।
पुलिस के लिए पहेली बनी अन्य राज्यों के पहचान पत्रों की मौजूदगी
मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोलकाता के इस पॉश इलाके में इस तरह से राष्ट्रीय स्तर के पहचान पत्रों का मिलना बेहद चिंताजनक और असामान्य बात है। दूसरे राज्यों के मूल निवासियों के ये जरूरी दस्तावेज आखिर पश्चिम बंगाल के इस विशेष राजनीतिक क्षेत्र में कैसे और किस मकसद से पहुंचे, यह सवाल फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बना हुआ है।
वोटर लिस्ट में हेरफेर की आशंका, बीजेपी ने लगाया धांधली का बड़ा आरोप
चुनाव के ठीक पहले टीएमसी दफ्तर से मिले इन दस्तावेजों को लेकर बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव को प्रभावित करने और वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों के नाम जोड़ने के लिए इन कार्डों का दुरुपयोग किया जा रहा था। हालांकि, टीएमसी नेतृत्व ने इन सभी राजनीतिक आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए कहा है कि पुलिस की निष्पक्ष जांच में जल्द ही पूरी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी।

