International News: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बड़े तेल टैंकर को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में खलबली मचा दी है। ईरानी सेना के मुताबिक, पाकिस्तान के झंडे वाले इस जहाज को बार-बार चेतावनी दी गई, लेकिन सहयोग न मिलने पर इसे ‘टारगेटेड स्ट्राइक’ के जरिए तबाह कर दिया गया। यह घटना उस समय हुई है जब इस संकरी समुद्री पट्टी पर नियंत्रण को लेकर तनाव चरम पर है। दुनिया की नजरें अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर टिकी हैं, क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है।
चेतावनी को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सीमाओं और जलक्षेत्र के नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा। आईआरजीसी (IRGC) के अनुसार, टैंकर बिना आधिकारिक अनुमति के इस संवेदनशील मार्ग को पार करने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा बलों ने पहले रेडियो संपर्क के जरिए जहाज को रोकने का निर्देश दिया। जब टैंकर के चालक दल ने इन चेतावनियों को हल्के में लिया, तो ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल किया। इस हमले के बाद जहाज पूरी तरह नष्ट हो गया है, जो ईरान के सख्त रुख को दर्शाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता सैन्य नियंत्रण
पिछले कुछ हफ्तों में इस क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ईरान ने हाल ही में यहां कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, जिसके तहत अब हर गुजरने वाले जहाज की गहन निगरानी हो रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान अब केवल अपने ‘मित्र देशों’ के जहाजों को ही सीमित आवाजाही की छूट दे रहा है। बिना अनुमति घुसने वाले किसी भी जहाज को दुश्मन मानकर कार्रवाई की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।
ऊर्जा संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ‘तेल की नस’ कहा जाता है। यहां होने वाली किसी भी छोटी हलचल का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। इस हमले के बाद तेल की सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। यदि समुद्री ट्रैफिक में इसी तरह गिरावट आती रही, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। दुनिया भर के विशेषज्ञ इस सैन्य कार्रवाई को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।


