मिडिल ईस्ट का नक्शा बदलने की तैयारी में नेतन्याहू, लितानी नदी पर कब्जे से दुनिया हैरान

Middle East News: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा बदलने की तैयारी में हैं। इजरायली सेना लेबनान की लितानी नदी तक के इलाके पर कब्जा करने जा रही है। यह इलाका लेबनान के कुल क्षेत्रफल का करीब 19 फीसदी है। इस बड़े सैन्य अभियान ने पूरी दुनिया की राजनीति में खलबली मचा दी है। इजरायल ने अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। अब नई सीमा लितानी नदी को ही माना जाएगा। इस कदम से दक्षिणी लेबनान पूरी तरह से इजरायल के नियंत्रण में आ जाएगा।

लितानी नदी के सभी पुल किए गए ध्वस्त

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इस रणनीति पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि इजरायली सेना ने लितानी नदी पर बने सभी पुलों को नष्ट कर दिया है। इसके पीछे का मकसद दक्षिणी लेबनान का संपर्क उत्तरी लेबनान से काटना है। अब इजरायल इस पूरे सुरक्षा क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले रहा है। यह इलाका नकोरा से लेकर शेबा फार्म्स तक करीब 80 किलोमीटर में फैला हुआ है। इस संवेदनशील क्षेत्र में लगभग 57 गांव और कस्बे आते हैं।

ग्रेटर इजरायल का सपना हो रहा है साकार

इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने भी खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नई इजरायली सीमा अब लितानी नदी ही होनी चाहिए। इस सैन्य अभियान को ग्रेटर इजरायल के नक्शे से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कहना है कि वे केवल एक बड़ा बफर जोन बना रहे हैं। उनका तर्क है कि इजरायल अपने शहरों को एंटी-टैंक हथियारों के खतरे से बचाना चाहता है। लेकिन असल में यह एक स्थायी कब्जे की मजबूत नींव है।

लाखों लोग हुए बेघर और गहराया संकट

इस युद्ध ने लेबनान में भारी तबाही मचाई है। लेबनान की करीब 20 फीसदी आबादी पूरी तरह बेघर हो चुकी है। इजरायल के इस आक्रामक जमीनी अभियान से वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस टकराव से मिडिल ईस्ट का शक्ति संतुलन बदल जाएगा। स्थानीय लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सेना के काफिलों का सहारा लेना पड़ रहा है। यह संकट अब एक व्यापक और खतरनाक युद्ध की तरफ बढ़ रहा है।

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