होर्मुज को लेकर ईरान ने अमेरिका के सामने रखी खतरनाक शर्त, क्या शांति वार्ता से पीछे हट गया तेहरान?

International News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरानी सरकार ने साफ किया है कि वे शांति वार्ता से पीछे नहीं हटे हैं। होर्मुज को खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपना आक्रामक रवैया नहीं छोड़ता, तब तक होर्मुज व्यापार के लिए बंद रहेगा। इस समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनिया भर में तेल आपूर्ति पर भारी संकट मंडराने लगा है। दोनों देशों का तनाव गहरा गया है।

ईरान ने बातचीत का दरवाजा खुला रखा

ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है। उनका कहना है कि ईरान हमेशा कूटनीति और शांतिपूर्ण बातचीत का पक्का समर्थक रहा है। अमेरिका के साथ पाकिस्तान में हुई हालिया वार्ता विफल होने के बावजूद ईरान ने हार नहीं मानी है। ईरान ने साफ किया है कि वे कभी भी बातचीत की मेज से उठकर नहीं गए थे। यह अमेरिका था जिसने अनुचित मांगें रखकर वार्ता को पटरी से उतारा था।

होर्मुज मार्ग पर ईरान की बड़ी शर्त

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्ग है। ईरान ने इस जलमार्ग से अमेरिकी जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका को पहले अपने कड़े आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाने होंगे। इसके अलावा अमेरिका को मध्य पूर्व में अपनी अनावश्यक सैन्य घुसपैठ भी रोकनी होगी। अगर अमेरिका ये बुनियादी शर्तें मान लेता है, तो ईरान होर्मुज को खोलने पर विचार करेगा।

अमेरिकी धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को गंभीर सैन्य परिणाम भुगतने की धमकियां दे रहे हैं। इसके बावजूद ईरान अपने कड़े रुख से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरानी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उनका देश अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है। अमेरिका धमकियों के बल पर ईरान से कोई भी समझौता जबरन बिल्कुल नहीं करा सकता है।

व्यापार और तेल बाजार में भारी खलबली

ईरान और अमेरिका की खींचतान ने ग्लोबल मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज से दुनिया का लगभग बीस प्रतिशत कच्चा तेल रोजाना गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। यूरोपीय देश इस बढ़ते तनाव को कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। अगर कोई शांतिपूर्ण समझौता नहीं होता है, तो दुनिया को बड़े आर्थिक संकट से जूझना पड़ेगा।

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