अबू धाबी में आसमान से बरसी मौत! ईरान की मिसाइल ने मचाई तबाही, मलबे की चपेट में आए 5 भारतीय

World News: मध्य पूर्व में छिड़ा महायुद्ध अब खौफनाक मोड़ ले चुका है। ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। ताजा हमला शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी स्थित अजबान इलाके में हुआ। यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। लेकिन मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से 5 भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। इस हमले ने खाड़ी देशों में रह रहे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिसाइल के मलबे से 12 लोग हुए लहूलुहान

अबू धाबी के सरकारी मीडिया कार्यालय के अनुसार, अजबान इलाके में हवाई सुरक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक मिसाइलों को रोका। हालांकि, आसमान से गिरे मलबे ने जमीन पर भारी नुकसान पहुँचाया। इस घटना में कुल 12 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 5 भारतीयों के अलावा 7 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। प्रशासन ने बताया कि नेपाल के एक नागरिक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। खाड़ी के आसमान में हर पल मिसाइलों की गूँज सुनाई दे रही है, जिससे आम जनता में भारी दहशत का माहौल है।

कुवैत की रिफाइनरी में लगी भीषण आग

ईरान की मिसाइलें सिर्फ यूएई तक सीमित नहीं रही। शुक्रवार को ईरान ने कुवैत को भी निशाना बनाया। ईरानी हमले के कारण कुवैत की एक बड़ी तेल रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। इसके अलावा एक डीसैलिनेशन प्लांट (पानी साफ करने वाला संयंत्र) को भी भारी नुकसान पहुँचा है। ईरान ने इजरायल और बहरीन में भी हमले जारी रखे हैं। तेहरान और इस्फहान जैसे ईरानी शहरों के आसपास भी युद्ध की गतिविधियाँ तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं।

परमाणु डील पर ईरान के पूर्व राजनयिक का बड़ा प्रस्ताव

भीषण जंग के बीच ईरान के भीतर से भी समाधान की आवाजें उठने लगी हैं। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने एक चौंकाने वाला सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान जंग खत्म करने के लिए अपने एनरिच्ड यूरेनियम के स्तर को कम कर सकता है। जरीफ ने यूरेनियम एनरिचमेंट को 3.67 प्रतिशत से कम करने का प्रस्ताव दिया है। यह वही स्तर है जो 2015 की न्यूक्लियर डील में तय हुआ था। उन्होंने चीन और रूस के साथ मिलकर एक सिंगल क्षेत्रीय एनरिचमेंट साइट बनाने का भी सुझाव दिया है।

ट्रंप का सख्त रुख और युद्ध की भविष्यवाणियाँ

एक तरफ जरीफ समझौते की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रुख पर अड़े हुए हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी तरह का यूरेनियम एनरिचमेंट नहीं करना चाहिए। अमेरिका की यह सख्ती संकेत दे रही है कि जब तक ईरान पूरी तरह झुक नहीं जाता, यह संघर्ष थमेगा नहीं। खाड़ी देशों में लगातार होते ये हमले वैश्विक तेल बाजार और भारतीय कामगारों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।

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