World News: लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ जारी इजरायल के सैन्य अभियान के बीच एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इजरायली सेना पर दक्षिणी लेबनान के घनी आबादी वाले नागरिक क्षेत्रों में अत्यधिक खतरनाक और ज्वलनशील ‘सफेद फास्फोरस’ युक्त गोला-बारूद के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे हैं।
इंटरनेट मीडिया पर वीडियो वायरल
विभिन्न वीडियो फुटेज, सैन्य विशेषज्ञों के गहन विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों की ग्राउंड रिपोर्टों के आधार पर यह बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 30 मई को करीब 40 हजार की आबादी वाले नबातियेह शहर के ऊपर सफेद फास्फोरस वाले गोलों के इस्तेमाल के पुख्ता संकेत मिले हैं।
इस ऐतिहासिक शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर इजरायली बलों के कब्जे के दौरान इंटरनेट मीडिया पर कई वीडियो प्रसारित हुए थे। इन वीडियो में सफेद फास्फोरस से निकलने वाली विशिष्ट धुएं की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। इसके अलावा टायर, कलाया, खियाम और योहमोर क्षेत्रों में भी इसके उपयोग के संकेत मिले हैं।
हवा के संपर्क में आते ही सुलग उठती है आग
हथियार विशेषज्ञों के मुताबिक, सफेद फास्फोरस एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो हवा के संपर्क में आते ही अपने आप अत्यधिक तेजी से जल उठता है। इसकी आग को बुझाना बेहद मुश्किल होता है। सेनाएं आमतौर पर युद्ध के मैदान में धुएं की आड़ बनाने या किसी खास लक्ष्य को चिह्नित करने के लिए इसका उपयोग करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून इस रासायनिक हथियार के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध तो नहीं लगाता, लेकिन आम नागरिकों या घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर इसका इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय युद्ध कानूनों का खुला उल्लंघन माना जाता है। मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
अमेरिकी निर्मित एम825ए1 गोलों का इस्तेमाल
विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इजरायल इस कार्रवाई के लिए अमेरिकी निर्मित 155 मिमी एम825ए1 आर्टिलरी गोलों का इस्तेमाल कर रहा है। इन घातक गोलों के भीतर सफेद फास्फोरस से लेपित 116 टुकड़े होते हैं, जो हवा में फटकर बहुत बड़े इलाके में आग और जहरीला धुआं फैलाते हैं।
दूसरी ओर, इजरायली सेना ने इन सभी गंभीर आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सेना का कहना है कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश धुआं पैदा करने वाले गोले सफेद फास्फोरस युक्त नहीं होते हैं। उन्होंने साफ किया कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध गोले मौजूद हैं, जिनका उपयोग केवल सुरक्षात्मक आड़ के लिए होता है।
Author: Pallavi Sharma

