Islamabad News: सिंधु जल समझौता स्थगित होने से पाकिस्तान के हुक्मरानों में गहरी बौखलाहट है। भारत के सख्त कदम से डरे पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस बुलाई। लेकिन भारतीय सेना के खौफ के कारण पाकिस्तानी नेता पूरे कार्यक्रम में सीधे भारत का नाम लेने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए।
बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी। इस बड़ी हार के सदमे से पड़ोसी देश अब तक उबर नहीं पाया है। यही वजह है कि पाकिस्तानी मंत्रियों ने भारत का नाम लेने के बजाय उसे ‘ताकतवर देश’ कहकर संबोधित किया है।
पाकिस्तानी सांसद मुसादिक मलिक ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोई भी ताकतवर मुल्क अपनी मर्जी से किसी इंटरनेशनल ट्रीटी को रद्द नहीं कर सकता। उन्होंने दलील दी कि इस समझौते ने दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच तीन बड़े युद्ध देखे हैं, फिर भी यह संधि हमेशा टिकी रही थी।
सांसद मलिक ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि संधियों की क्या अहमियत रह जाएगी, अगर कोई मजबूत देश एकतरफा फैसला ले ले। उन्होंने कहा कि सुबह सोकर उठते ही यह कह देना कि समझौता लागू नहीं होता, पूरी तरह गलत है। ऐसे रवैये से हमेशा नुकसान होता है।
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत का एक्शन
पाकिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन वह यह भूल गया कि भारत ने यह कदम उसकी हरकतों की वजह से उठाया है। पिछले साल अप्रैल में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने निर्दोष पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
इस भीषण आतंकी हमले में करीब 26 लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने तुरंत सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन को रोक दिया था। साथ ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे कई बड़े आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था।
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है कि देश के नागरिकों का खून और नदियों का पानी एक साथ नहीं बह सकते। भारत की इस कड़ी कूटनीति और सख्त मिलिट्री कार्रवाई के बाद से ही पूरे पाकिस्तान में लगातार मातम पसरा हुआ है।
पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री और बिलावल भुट्टो ने अलापा पुराना राग
इस विशेष कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने बेहद बेतुके बयान दिए। डार ने दावा किया कि पाकिस्तान भारत के इस एकतरफा फैसले को पूरी तरह खारिज करता है। उनके मुताबिक यह संधि आज भी पूरी तरह से वैध है और इसे एकतरफा समाप्त नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया था। पूर्व विदेश मंत्री जरदारी ने जलमार्गों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ एक नए ग्लोबल कन्वेंशन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि नदियों के पानी से किसी देश पर दबाव नहीं बनाना चाहिए।
बिलावल जरदारी ने सिंधु नदी के पानी की तुलना सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और स्वेज नहर से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह होर्मुज के बिना अमेरिका और ईरान में शांति संभव नहीं है, ठीक वैसे ही सिंधु जल संधि के बिना भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर टिक नहीं सकता।
हाइड्रोलॉजिकल डेटा रुकने से भुखमरी की कगार पर पहुंचा पाकिस्तान
सिंधु जल समझौते पर दोनों देशों ने 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर किए थे। अब इसके रुकने से पाकिस्तान की पूरी इकोनॉमी संकट में आ गई है। भारत द्वारा नदियों का हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयर न करने से पाकिस्तान को पानी के फ्लो का सटीक अंदाजा नहीं मिल पा रहा है।
डेटा न मिलने के कारण पाकिस्तान समय पर बाढ़ या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की प्लानिंग नहीं कर पा रहा है। पड़ोसी देश की पूरी एग्रीकल्चर और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स इसी सिंधु नदी पर निर्भर हैं। भारत के इस कड़े कदम से पाकिस्तान में गहरा खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है।
