आखिर अंतिम संस्कार के समय लोग क्यों ले जाते हैं छाता? चीन और ब्रिटेन की परंपराओं में छिपा है राज

Beijing News: छाता आमतौर पर धूप और तेज बारिश से बचने का एक सामान्य साधन माना जाता है। हालांकि, दुनिया के कुछ देशों में यह अंतिम संस्कार जैसी गंभीर परंपराओं का भी एक अहम हिस्सा है। इसके पीछे के कारण हर देश की अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक मान्यताओं और व्यावहारिक जरूरतों पर निर्भर करते हैं।

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चीन में छाते और आत्मा से जुड़ी हैं कई पारंपरिक मान्यताएं

चीन की कुछ पारंपरिक लोक मान्यताओं के अनुसार, छाता केवल बारिश से बचाने वाला साधन नहीं है, बल्कि इसे एक आध्यात्मिक प्रतीक भी माना जाता है। लोकविश्वासों के मुताबिक, गीली छतरी ‘यिन ऊर्जा’ को आकर्षित करती है, जिसे चीनी दर्शन में अंधकार और आध्यात्मिक दुनिया से जोड़कर देखा जाता है।

मृतक की आत्मा को सूर्य की तेज रोशनी से बचाने की कोशिश

इन्हीं मान्यताओं के चलते कुछ पारंपरिक चीनी अंत्येष्टि संस्कारों में मृतक की तस्वीर या ताबूत के ऊपर जानबूझकर काली छतरी रखी जाती है। वहां के लोगों में यह अटूट लोक मान्यता है कि छाता मृतक की पवित्र आत्मा को सूर्य की तेज रोशनी से बचाता है और अंतिम यात्रा सुगम बनाता है।

गिफ्ट में छाता देना क्यों माना जाता है बेहद अशुभ?

चीनी भाषा में छाते के लिए प्रयुक्त शब्द ‘सान’ का उच्चारण उस शब्द से मिलता-जुलता है जिसका अर्थ ‘बिछड़ना’ होता है। इसी कारण कई चीनी लोग मानते हैं कि किसी प्रिय व्यक्ति को छाता उपहार में देना रिश्ते में अलगाव ला सकता है। यह विशुद्ध रूप से एक सांस्कृतिक मान्यता है।

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ब्रिटेन में अंतिम संस्कार में छाता ले जाने की वजह व्यावहारिक

यूनाइटेड किंगडम (यूके) में अंतिम संस्कार के दौरान काला छाता लेकर जाना किसी अंधविश्वास या आत्मा से नहीं जुड़ा है। ब्रिटेन का मौसम बेहद अनिश्चित माना जाता है और वहां अचानक बारिश होना बहुत आम है। इसलिए लोग सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने के लिए व्यावहारिक तौर पर छाता साथ रखते हैं।

वैज्ञानिक प्रमाणों से परे है छाते से जुड़ा यह सामाजिक ताना-बाना

विज्ञान में अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि छाते का संबंध किसी अलौकिक शक्ति से होता है। चीन में जहां यह मान्यता पूरी तरह सांस्कृतिक और लोकविश्वासों पर आधारित है, वहीं ब्रिटेन में यह मौसम से जुड़ी एक औपचारिक आदत है जो समय के साथ वहां की सामाजिक परंपरा बन चुकी है।

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