Lucknow News: उत्तर प्रदेश एसटीएफ की लखनऊ इकाई ने ओवरलोड ट्रकों से अवैध वसूली करने वाले एक बड़े फर्जी आरटीओ गैंग का पर्दाफाश किया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने आरटीओ के एक सिपाही समेत चार शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पकड़े गए आरोपियों में पूर्व सपा मंत्री अंबिका चौधरी का चचेरा भाई विपिन कुमार यादव और भतीजा आकाश चौधरी शामिल हैं। एसटीएफ ने इनके पास से 42,500 रुपये नकद, फर्जी आईडी, चार मोबाइल फोन और दो लग्जरी कारें बरामद की हैं।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है। एसटीएफ ने वाराणसी के फूलपुर थाने में कुल 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
लखनऊ के इकाना स्टेडियम के पास हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ की टीम को लंबे समय से इस गिरोह की शिकायतें मिल रही थीं। यह गैंग विभिन्न जिलों में कमर्शियल ट्रकों को बिना कार्रवाई पास कराने के नाम पर वसूली करता था। एसटीएफ ने मुख्य आरोपी विपिन यादव को इकाना स्टेडियम के पास से दबोचा।
पूछताछ में विपिन ने बताया कि वह 2005 से परिवहन विभाग में सिपाही है। वर्तमान में उसकी तैनाती गाजीपुर जिले में है। उसने विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और अपने साथियों के साथ मिलकर यह अवैध नेटवर्क तैयार किया था।
यह गिरोह वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र और मीरजापुर जैसे पूर्वांचल के जिलों में बेहद सक्रिय था। आरोपी प्रत्येक ओवरलोड ट्रक से तीन हजार रुपये तक की मोटी रकम वसूलते थे। इसके बाद ट्रकों को बिना किसी चेकिंग के सुरक्षित आगे बढ़ा दिया जाता था।
परिवहन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचता था पैसा
गिरोह के सदस्य ट्रक ड्राइवरों को आरटीओ की लाइव लोकेशन पहले ही दे देते थे। चेकिंग की सटीक जानकारी मिलने से ड्राइवर आसानी से बच निकलते थे। अवैध वसूली का यह पैसा गिरोह के सभी सदस्यों और कुछ अधिकारियों के बीच बांटा जाता था।
इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। मामले में नामजद सतीश चौधरी, भोला चौधरी और हृदय चौधरी भी पूर्व मंत्री के भाई हैं। सतीश चौधरी विकासखंड हनुमानगंज का पूर्व ब्लॉक प्रमुख रहा है और उसका बड़ा कारोबार है।
सतीश चौधरी पूर्व में हुए खाद्यान्न घोटाले का भी आरोपी है और उसके कई ट्रक चलते हैं। इस मामले में उसका बेटा सौरभ चौधरी भी नामजद है। फिलहाल पूर्व मंत्री के ये चारों रसूखदार रिश्तेदार पुलिस की पकड़ से दूर और फरार हैं।
वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने मामले की जांच पिंडरा के सहायक पुलिस आयुक्त प्रतीक कुमार को सौंप दी है। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है। इस अवैध धंधे में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
Author: Ajay Mishra

