SRN Hospital Strike: जूनियर डॉक्टर को घर से उठाने पर भड़के रेजीडेंट्स, एसआरएन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज बेहाल

Uttar Pradesh News: प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों और वकीलों का विवाद गहरा गया है। सोमवार को जूनियर डॉक्टरों ने एक बार फिर अचानक हड़ताल शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित कदम से अस्पताल आए हजारों मरीज बिना इलाज के परेशान होते रहे और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई।

बरेली के रामपुर स्थित आवास से जूनियर डॉक्टर मोहसिन सिद्दीकी को अज्ञात लोगों ने उठा लिया था। इस घटना से नाराज रेजीडेंट डॉक्टरों ने अस्पताल की ओपीडी, रजिस्ट्रेशन और जांच सेवाएं बंद करा दीं। सभी काउंटरों पर ताले लटकने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने एकजुट होकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया।

दिन में 11 बजे ठप हो गईं सुपर स्पेशयलिटी सेवाएं

पीएमएसएसवाई ब्लॉक में संचालित होने वाली सुपर स्पेशयलिटी ओपीडी सुबह 11 बजे पूरी तरह ठप हो गई। न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी जैसी ओपीडी से सभी वरिष्ठ डॉक्टर उठकर चले गए। सुबह से कतार में खड़े मरीजों को बिना परामर्श के ही वापस लौटना पड़ा।

ओपीडी बंद होने के साथ ही अस्पताल में सीटी स्कैन और डिजिटल एक्स-रे सेवाएं भी बंद रहीं। रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नृपेंद्र ने डॉक्टरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस पूर्व में दी गई शिकायतों पर एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है।

एसोसिएशन ने मांग की है कि डॉक्टर मोहसिन सिद्दीकी को किसने उठाया, इसका तुरंत खुलासा हो। डॉक्टरों ने साफ किया कि जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, वे काम पर नहीं लौटेंगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि आईसीयू और वार्डों में आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।

20 मई को डॉक्टरों और वकीलों में हुआ था विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते 20 मई को हुई थी। सड़क दुर्घटना में घायल एक वकील के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया गया था। इसके बाद डॉक्टरों और वकीलों के बीच मारपीट हुई थी। तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 20 रेजीडेंट डॉक्टरों को सस्पेंड किया था।

एसआरएन अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन तीन हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। सोमवार सुबह अचानक डॉक्टरों के चले जाने से दूर-दराज से आए मरीज ठगे से रह गए। प्रतापगढ़, नैनी और करेली से आए गंभीर मरीजों का नंबर आने से पहले ही हड़ताल हो गई।

हड़ताल के दौरान सुरक्षा गार्डों ने मरीजों और उनके तीमारदारों को ब्लॉक से बाहर निकाल दिया। इस संकट के समय मरीजों का दर्द सुनने के लिए कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। लाचार मरीज और उनके परिजन अस्पताल परिसर में ही इधर-उधर भटकने को मजबूर दिखे।

दोपहर बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एके वर्मा और उप जिलाधिकारी डॉक्टरों को समझाने पहुंचे। डॉक्टरों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने जमकर नारेबाजी की। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक बातचीत हुई, लेकिन जूनियर डॉक्टर काम पर वापस लौटने को राजी नहीं हुए।

प्रिंसिपल डॉ. एके वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों के आक्रोश को शांत करने का प्रयास जारी है। मरीजों की परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक रोस्टर तैयार किया गया है। जिला प्रशासन के सहयोग से गायब डॉक्टर की तलाश की जा रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।

Author: Ajay Mishra

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories