Uttar Pradesh News: बुंदेलखंड के महोबा जिले में ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगमन से अचानक सियासी और धार्मिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। शंकराचार्य ने प्रसिद्ध चंडिका देवी मंदिर में विशेष पूजा की। इसके बाद उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पदयात्रा को अपना खुला समर्थन दे दिया।
शंकराचार्य ने गायों के सम्मान में निकाली जा रही इस बड़ी यात्रा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस मुहिम से भावनात्मक रूप से जुड़ रही है। लोग यात्रा में शामिल होकर तीनों प्रमुख संकल्पों को पूरा करने की कसम खा रहे हैं।
गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग पर अड़े शंकराचार्य
जगद्गुरु शंकराचार्य ने गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की अपनी पुरानी मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से दोहराया। उन्होंने कहा कि आज देश का हर नागरिक इस मांग के समर्थन में खड़ा है। समाज का कोई भी वर्ग अब इस मुद्दे पर चुप नहीं है।
इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी पर बेहद तीखे राजनीतिक बाण छोड़े। उन्होंने कहा कि पूरे देश से गौ माता के लिए आवाजें उठ रही हैं। लेकिन केवल भाजपा नेताओं के मुंह पर ताला लगा हुआ है। वे गाय को माता बोलने से लगातार कतरा रहे हैं।
जानवरों की श्रेणी से बाहर हो गाय, केंद्र की नीयत पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि हम किसी इंसान को जानवर घोषित कर दें, तो लोग उसके साथ बुरा बर्ताव शुरू कर देते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह गाय को पशुओं की श्रेणी से तुरंत बाहर निकाले। उसे कानूनी रूप से माता का दर्जा दे।
उन्होंने केंद्र सरकार की लोकतांत्रिक नीतियों पर सीधे सवाल खड़े किए। शंकराचार्य ने पूछा कि जब देश का बहुत बड़ा बहुमत गाय को माता मान चुका है, तो फिर सरकार को फैसला लेने में क्या दिक्कत है? क्या सरकार जनता की इस गूंजती हुई आवाज को दबाना चाहती है?
Author: Harikarishan Sharma

