एचआरटीसी यूनियन अध्यक्ष के अचानक तबादले से भड़का भारी आक्रोश, क्या हिमाचल प्रदेश में रुक पहिए जाएंगे बसों के?

Himachal Pradesh News: हिमाचल पथ परिवहन निगम में लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। निगम प्रबंधन ने अचानक एचआरटीसी ड्राइवर-कंडक्टर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर का तबादला कर दिया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

मुख्यालय शिमला से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार चालक पद पर तैनात मान सिंह ठाकुर को शिमला ढली लोकल यूनिट से हटाकर चंबा यूनिट भेजा गया है। कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले को आंदोलन दबाने की साजिश बताया है। इस बड़े बदलाव के बाद पूरे प्रदेश के बस डिपो में हलचल बढ़ गई है।

प्रदर्शन के महज कुछ घंटों बाद ही थमाया गया ट्रांसफर लेटर

दिलचस्प बात यह है कि शनिवार को ही राजधानी के ओल्ड बस स्टैंड परिसर में ड्राइवरों और कंडक्टरों ने बड़ा प्रदर्शन किया था। मान सिंह ठाकुर खुद इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। प्रदर्शन खत्म होने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके तबादले का आदेश सार्वजनिक हो गया।

मान सिंह ठाकुर पिछले लंबे समय से कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी, नाइट ओवरटाइम एरियर और अन्य भत्तों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे थे। यूनियन ने पहले ही 25 जून से प्रदेशव्यापी चक्का जाम करने की अंतिम चेतावनी सरकार को दे रखी है। इस संवेदनशील समय में यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

परिवहन मंत्री के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हैं निगाहें

इस पूरे मामले पर मान सिंह ठाकुर ने कहा कि वे इस तबादले से बिल्कुल नहीं घबराएंगे। उन्होंने बताया कि परिवहन मंत्री और उपमुख्यमंत्री ने यूनियन को 23 जून को वार्ता के लिए बुलाया है। एक तरफ सरकार बातचीत का निमंत्रण देती है और दूसरी तरफ तबादला आदेश जारी करती है।

उन्होंने नाराज कर्मचारियों से अपील की है कि वे किसी व्यक्ति विशेष के लिए बसें खड़ी न करें। वे अपने साथियों को समझाएंगे कि यह लड़ाई पूरी कम्युनिटी के हक और मांगों के लिए है। संगठन अब 23 जून को सरकार के साथ होने वाली उच्च स्तरीय बैठक के नतीजों का इंतजार करेगा।

करोड़ों का नाइट ओवरटाइम और सैलरी एरियर है पूरी तरह बकाया

ड्राइवर-कंडक्टर यूनियन ने इस वित्तीय संकट को सुलझाने के लिए प्रशासन को 24 जून तक का समय दिया है। यदि समय रहते उनकी जायज मांगें पूरी नहीं हुईं तो 25 जून से पूरे हिमाचल प्रदेश में सरकारी बसों का चक्का जाम होना तय माना जा रहा है।

यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि पिछले साढ़े तीन सालों से उनकी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 75 महीनों का नाइट ओवरटाइम एरियर बकाया है, जिसकी कुल राशि लगभग 150 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पे-रिवीजन एरियर और महंगाई भत्ते का भुगतान भी अब तक नहीं हुआ है।

Reported By: Sunita Gupta

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