Shimla News: प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों (एसटीडी) का खतरा बेहद तेजी से बढ़ रहा है। जनजातीय विकास विभाग द्वारा कराए गए एक विशेष शोध अध्ययन की रिपोर्ट में यह बेहद चिंताजनक खुलासा हुआ है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ओंकार चंद शर्मा ने इस आधिकारिक रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है।
आईजीएमसी शिमला के सहयोग से हुआ बड़ा रिसर्च
यह महत्वपूर्ण अध्ययन इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहयोग से पूरा किया गया है। करीब 12 महीनों तक चले इस गहन रिसर्च में लोगों में जागरूकता की भारी कमी पाई गई। साथ ही कंडोम का कम इस्तेमाल और अधूरा इलाज संक्रमण फैलने की मुख्य वजह बने हैं।
तीन हजार लोगों पर हुआ वैज्ञानिक सर्वे
इस बड़े शोध में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के कुल 3,000 लोगों को शामिल किया गया था। अध्ययन के नतीजों में सामने आया है कि जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोग संबंधी लक्षणों की कुल व्यापकता 20 प्रतिशत है। यानी हर पांचवां व्यक्ति इस गंभीर समस्या के लक्षणों से जूझ रहा है।
चंबा जिले के लोग संक्रमण से सबसे ज्यादा पीड़ित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिला चंबा में सबसे अधिक 24.2 प्रतिशत लोग प्रभावित पाए गए हैं। वहीं किन्नौर जिले में यह आंकड़ा 20.1 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके अलावा लाहुल स्पीति में 15.7 प्रतिशत लोग इस संक्रमण की चपेट में हैं। सर्वे के लिए हर जिले से 1,000 प्रतिभागियों को चुना गया था।
35 से 44 आयु वर्ग पर सबसे बड़ा हमला
रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि 35 से 44 वर्ष के आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा (33.5 प्रतिशत) प्रभावित हैं। इस शोध में शामिल कुल लोगों में 54.3 प्रतिशत पुरुष और 45.7 प्रतिशत महिलाएं थीं। इनमें से 61.7 प्रतिशत लोग विवाहित थे और अधिकांश के यौन संबंध स्थिर पाए गए।
सिर्फ 24 प्रतिशत लोगों ने किया कंडोम का इस्तेमाल
सुरक्षित शारीरिक संबंधों को लेकर इस रिपोर्ट में बेहद डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। केवल 24.9 प्रतिशत लोगों ने अपने अंतिम यौन संबंध के दौरान कंडोम का उपयोग किया था। जबकि 38 प्रतिशत लोगों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया और 33.1 प्रतिशत ने माना कि उन्होंने कभी कंडोम छुआ तक नहीं।
इलाज के बीच में ही भाग रहे हैं मरीज
सर्वे में शामिल 72 प्रतिशत लोगों ने एसटीडी के बारे में सुना जरूर था, लेकिन उनकी जानकारी बेहद अधूरी थी। संक्रमण के बाद 90.2 प्रतिशत प्रभावित लोगों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया। मगर बेहद चिंता की बात यह है कि केवल 12.3 प्रतिशत मरीजों ने ही अपना पूरा मेडिकल कोर्स खत्म किया।
एचआईवी और हेपेटाइटिस जांच की दर बेहद खराब
इस रिसर्च में यह भी देखा गया कि एचआईवी (HIV) और हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों की जांच कराने वाले लोगों की संख्या न के बराबर है। दूरदराज के इलाकों में सामाजिक संकोच और लोक-लाज के डर से लोग टेस्ट नहीं कराते। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक बीमार लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी सरकार
जनजातीय विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। लोगों को जागरूक करने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनेगी। इस मौके पर विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. विक्रम सिंह नेगी समेत कई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहे।
Author: Sunita Gupta


