Himachal News: हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड के तकनीकी कर्मचारियों में भारी रोष है। राज्य बिजली बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने लंबित पदोन्नति और वरिष्ठता की विसंगतियों का मुद्दा उठाया है। संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक कड़ा पत्र लिखा है। इसके साथ ही विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना को भी शिकायत भेजी गई है। कर्मचारियों ने सचिवालय में रुकी हुई पदोन्नति की फाइल को तुरंत पास करने की जोरदार मांग की है।
सचिवालय में दो महीने से लटकी है पदोन्नति की फाइल
प्रदेशाध्यक्ष रणवीर सिंह ठाकुर और महासचिव चमन शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कई महत्वपूर्ण डिवीजनों के टीमेट की फाइल सचिवालय में फंसी है। इनमें धर्मशाला, पालमपुर, शाहपुर, बैजनाथ, लंबागांव, हरोली, ठियोग और सुन्नी डिवीजन मुख्य रूप से शामिल हैं। इन सभी जगहों के कर्मचारियों को सहायक लाइनमैन के पद पर प्रमोट किया जाना है। लेकिन पिछले दो माह से यह जरूरी फाइल सचिवालय में मंजूरी के लिए धूल फांक रही है।
भेदभावपूर्ण रवैये से कर्मचारियों में पनप रहा है भारी असंतोष
राज्य सरकार और बोर्ड प्रबंधन के इस भेदभावपूर्ण रवैये से कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। संघ के नेताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इस रुकी हुई फाइल के बाद कई अन्य फाइलें सचिवालय भेजी गई थीं। हैरानी की बात यह है कि बाद में भेजी गई सभी फाइलें तुरंत मंजूर हो गईं। उनके पदोन्नति आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इस दोहरी नीति ने तकनीकी कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।
वरिष्ठता में विसंगति से मेरिट वाले कर्मचारी पिछड़ रहे
संघ ने पदोन्नति की प्रक्रिया को पहले की तरह स्थानीय स्तर पर करने की मांग की है। पहले यह काम डिवीजन और सर्कल स्तर पर होता था। अब फाइल सचिवालय भेजने से वरिष्ठता में भारी विसंगतियां पैदा हो रही हैं। साल 2015, 2017, 2019 और 2021 में मेरिट के आधार पर टीमेट की भर्तियां हुई थीं। अब अलग-अलग समय पर फाइल पास होने से मेरिट वाले सीनियर कर्मचारी लगातार पिछड़ रहे हैं। जूनियर कर्मचारी पदोन्नत होकर उनसे आगे निकल रहे हैं।


