Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित चेस्टर हिल्स हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासनिक गलियारों में घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और रेरा (RERA) के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत बालदी ने वर्तमान मुख्य सचिव संजय गुप्ता के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। बालदी ने इस पूरे विवाद के लिए संजय गुप्ता की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। यह विवाद तब और गहरा गया जब उच्च पदस्थ अधिकारी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए।
श्रीकांत बालदी ने मुख्य सचिव की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पूर्व रेरा अध्यक्ष श्रीकांत बालदी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर कड़ा प्रहार किया है। बालदी का कहना है कि संजय गुप्ता उन पर निराधार आरोप लगाकर अपनी गलतियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट में उपजा मौजूदा विवाद मुख्य सचिव के दो विवादित आदेशों का परिणाम है। बालदी के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप राज्य की छवि के लिए चिंताजनक हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के निरीक्षण और पंजीकरण प्रक्रिया पर दी सफाई
बालदी ने अपने कार्यकाल के दौरान चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट के दौरे को लेकर स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि लगभग तीन साल पहले उन्होंने अथॉरिटी के सदस्यों और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों के साथ फेज-1 का दौरा किया था। उस समय फेज-2 और फेज-4 का अस्तित्व ही नहीं था, इसलिए वहां किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का सवाल ही नहीं उठता। बालदी ने कहा कि रेरा पंजीकरण एक पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया है, जिसमें सभी जरूरी दस्तावेज जमा होने के बाद ही प्रमाणपत्र मिलता है।
शक्तियों के दुरुपयोग और अवैध निर्माण का मामला
श्रीकांत बालदी ने आरोप लगाया कि एसडीएम सोलन ने धारा 118 के उल्लंघन की पुष्टि की थी, लेकिन संजय गुप्ता ने बिना अधिकार के उस रिपोर्ट को गलत ठहराया। इसके बाद हिमाचल सरकार ने मुख्य सचिव के उस आदेश को रद्द कर दिया था। बालदी ने यह भी बताया कि नगर निगम सोलन द्वारा अवैध निर्माण गिराने के आदेश को भी मुख्य सचिव ने अवैध रूप से रोका था। उन्होंने कहा कि अपील का अधिकार केवल जिला न्यायाधीश को होता है, ऐसे में मुख्य सचिव का हस्तक्षेप शक्ति का दुरुपयोग है।
रेरा की कार्रवाई और जुर्माने का दिया हवाला
बालदी ने जोर देकर कहा कि उनके कार्यकाल में चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट के पक्ष में कोई भी नियम विरुद्ध आदेश जारी नहीं किया गया। इसके विपरीत, जब शिकायतें प्राप्त हुईं, तो रेरा ने बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेरा केवल पंजीकरण का कार्य करता है, जबकि जमीन और निर्माण संबंधी अन्य अनुमतियां राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा दी जाती हैं। इस प्रक्रिया में रेरा की भूमिका पूरी तरह नियमबद्ध रही है।
सरकार से अवैध निर्माण हटाने और कार्रवाई की मांग
पूर्व अध्यक्ष ने मांग की है कि सोलन के जिला उपायुक्त को धारा 118 के उल्लंघन पर तत्काल कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि 6 नवंबर 2025 के उस आदेश को रद्द किया जाए जिसके कारण अवैध निर्माण पर कार्रवाई रुकी हुई है। बालदी ने कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि दोषियों पर कार्रवाई हो। यह विवाद अब पूरी तरह से हिमाचल की नौकरशाही के बीच एक बड़ी जंग में तब्दील हो चुका है, जिस पर सरकार की नजर बनी हुई है।
प्रशासनिक टकराव से बढ़ी प्रदेश में सियासी हलचल
मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा रेरा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र के बाद शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच इस सार्वजनिक टकराव ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। बालदी ने अंत में कहा कि संजय गुप्ता की कार्यशैली पहले भी चर्चा में रही है और अब वे अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पूर्व अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं। फिलहाल, चेस्टर हिल्स का यह मामला कानूनी और प्रशासनिक पेचों में उलझा हुआ है।


