हॉर्मुज संकट से देश में मचेगी भारी हाहाकार, पेट्रोल-डीजल ही नहीं, अब आपकी रसोई और बाथरूम का बजट भी बिगड़ेगा

New Delhi News: पश्चिम एशिया के खतरनाक भू-राजनीतिक हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हॉर्मुज जलमार्ग बंद होने की आशंकाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। इस महासंकट के कारण केवल पेट्रोल और डीजल के दामों में ही भारी बढ़ोतरी नहीं होगी।

इस तनाव ने पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों को लेकर भी एक बहुत बड़ा वैश्विक संकट खड़ा कर दिया है। आम जनता की जेब पर जल्द ही महंगाई का एक बहुत बड़ा बोझ बढ़ने वाला है। यह वित्तीय संकट केवल पेट्रोल पंपों की मशीनों तक सीमित नहीं रहेगा।

इस बड़े संकट का सीधा असर अब हर एक परिवार की रसोई और बाथरूम तक पहुंचने की पूरी आशंका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में जब भी भारी उछाल आता है, तो पेट्रोकेमिकल्स उत्पाद भी सीधे महंगे हो जाते हैं।

साबुन से लेकर प्लास्टिक सामानों की उत्पादन लागत में होगा भारी इजाफा

इक्रा (ICRA) और एसबीआई (SBI) रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस कमरतोड़ महंगाई का विपरीत असर हर घर के मासिक राशन पर पड़ेगा। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले साबुन, कपड़े धोने के डिटर्जेंट और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स पेट्रोकेमिकल कच्चे माल पर ही निर्भर होते हैं।

इसके अलावा प्लास्टिक से बनने वाली बाल्टियां, पानी की बोतलें और डिब्बों की उत्पादन लागत भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों जैसे बिस्कुट, खाने के तेल और नूडल्स बनाने वाली एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों पर इस मंदी का दोहरा असर पड़ेगा।

कंपनियों के लिए एक तरफ जरूरी पैकेजिंग सामग्री बहुत ज्यादा महंगी हो जाएगी, तो दूसरी तरफ महंगे ईंधन के कारण माल ढुलाई यानी ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ जाएगा। लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की लागत बढ़ने से भविष्य में विदेशी गैजेट्स भी महंगे होंगे।

अठासी प्रतिशत कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता बनी भारत के लिए बड़ी मुसीबत

इस पूरे वैश्विक तनाव के बीच भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल को लेकर दूसरे देशों पर भारी निर्भरता है। भारत अपनी कुल तेल खपत का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से ही आयात करता है। यह संकट देश के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम है।

हालांकि मौजूदा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास रूस, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से तेल मंगाने के मजबूत वैकल्पिक रास्ते हैं। इसके अलावा हमारे पास किसी भी विषम परिस्थिति के लिए देश का अपना रणनीतिक भंडार भी है।

लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि यदि यह अंतरराष्ट्रीय युद्ध लंबे समय तक नहीं थमता है, तो हमारा सुरक्षित भंडार भी नाकाफी साबित होगा। कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से उद्योगों में उत्पादन कम होगा, जिससे देश में महंगाई की नई लहर आएगी।

Author: Rajesh Kumar

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