पॉलिटिकल पार्टी का प्रवक्ता बनने के लिए कौन सी डिग्री है जरूरी और कैसे मिलती है टीवी डिबेट में एंट्री?

Delhi News: टीवी चैनलों पर होने वाली तीखी बहसों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनीतिक दलों का पक्ष रखने वाले प्रवक्ता आज देश का बड़ा चेहरा बन चुके हैं। बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी बड़ी पार्टियों के ये लीडर्स हर नेशनल मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने का सही रास्ता क्या है?

भारत में किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का ऑफिशियल प्रवक्ता बनने के लिए संविधान या चुनाव आयोग ने कोई खास शैक्षणिक योग्यता तय नहीं की है। कानूनी रूप से इसके लिए किसी विशेष डिग्री का होना बिल्कुल अनिवार्य नहीं है। हालांकि मीडिया और पब्लिक डीलिंग के इस काम में कुछ खास विषयों की पढ़ाई उम्मीदवारों के लिए बेहद मददगार साबित होती है।

इन कोर्सेज की पढ़ाई से मिलती है करियर में बड़ी बढ़त

जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, पॉलिटिकल साइंस और पब्लिक रिलेशंस जैसे कोर्सेज की पढ़ाई करने वाले युवाओं को इस क्षेत्र में बड़ी प्राथमिकता मिलती है। इसके अलावा लॉ, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और इंटरनेशनल रिलेशंस की डिग्री भी काफी काम आती है। इन विषयों से देश की राजनीतिक व्यवस्था, मीडिया मैनेजमेंट और सरकारी नीतियों की समझ बहुत मजबूत होती है।

राजनीतिक प्रवक्ता बनने के लिए केवल किताबी ज्ञान या बड़ी डिग्रियां ही काफी नहीं होती हैं। इस फील्ड में सफलता पाने के लिए बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स का होना सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है। एक अच्छे प्रवक्ता को टीवी डिबेट्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रेस ब्रीफिंग में अपनी बात को पूरी स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ पेश करना पड़ता है।

कठिन सवालों के जवाब देने के लिए इन स्किल्स की है जरूरत

नेताओं को देश-दुनिया की ताजा खबरों, सामाजिक मुद्दों और अपनी पार्टी की विचारधारा की गहरी जानकारी होनी चाहिए। टीवी डिबेट के दौरान अक्सर विरोधी दलों के नेता तीखे सवाल और पर्सनल अटैक करते हैं। ऐसी स्थिति में प्रवक्ता के पास मजबूत लॉजिक, धैर्य और तुरंत सटीक जवाब देने की गजब की क्षमता होनी चाहिए।

आमतौर पर सभी राजनीतिक दल अपने सबसे पुराने, सक्रिय और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को ही प्रवक्ता की बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हैं। इसके लिए ग्राउंड लेवल पर पार्टी के लिए लंबे समय तक काम करना पड़ता है। संगठन की गतिविधियों में हिस्सा लेकर बड़े नेताओं का भरोसा जीतना इस सफर का सबसे मुख्य और जरूरी पड़ाव माना जाता है।

Author: Harikarishan Sharma

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