Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) और फोरलेन निर्माण से जुड़ी जनहित याचिका पर सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश की समय पर तामील न करने वाली निर्माण कंपनी पर लापरवाही बरतने के लिए ₹1,00,000 का जुर्माना (Cost) लगाया है।
अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर पाया दोषी
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट का मुख्य उद्देश्य इस लोकहित के काम को जल्द पूरा करवाना था। कंपनी ने अदालत को दी गई अपनी लिखित अंडरटेकिंग का सीधा उल्लंघन किया था, जिस पर उसे अवमानना का दोषी पाया गया है।
संबंधित निर्माण कंपनी ने नई अर्जी देकर बताया कि बदले हुए प्रोजेक्ट स्कोप के तहत जुलाई 2025 में काम पूरा कर लिया गया है। चूंकि मुख्य काम धरातल पर पूरा हो चुका है, इसलिए कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद करने का फैसला सुनाया है।
एक महीने के भीतर वेलफेयर फंड में जमा करानी होगी राशि
इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कंपनी को एक महीने के भीतर जुर्माने की राशि हाई कोर्ट इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन फंड में जमा करने का सख्त आदेश दिया गया है। अदालत ने इस वित्तीय योगदान को सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानूनी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
दूसरी ओर, लोक निर्माण विभाग (PWD) मंडी के अधीक्षण अभियंता ने अदालत में अपना आधिकारिक हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने बेंच को बताया कि ड्योड के पास भारी लैंडस्लाइड से क्षतिग्रस्त हुई 200 मीटर मुख्य सड़क को अब पूरी तरह बहाल कर यातायात के लिए खोल दिया गया है।
NHAI को बची हुई बजट राशि जल्द जारी करने का निर्देश
इस पूरे सड़क बहाली कार्य को समय पर पूरा करने के लिए ₹5,51,13,973 का कुल बजट स्वीकृत किया गया था। इस तय बजट में से 50 प्रतिशत राशि विभाग द्वारा पहले ही जारी की जा चुकी है, जिससे निर्माण कार्यों को काफी गति मिली।
हाई कोर्ट ने अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को कड़ा आदेश दिया है कि वह बची हुई वित्तीय राशि जल्द से जल्द जारी करे। इस पूरे महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई को नियमित मुख्य खंडपीठ के समक्ष विस्तार से होगी।

