कलियुग में मोक्ष और संकटों से मुक्ति दिलाएंगी ये 4 जादुई मालाएं, जानिए किस देवता के लिए कौन सी है सबसे बेस्ट

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Delhi News: हिंदू धर्म में मंत्रों के जाप का एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। कई बार हम लोगों को अलग-अलग मोतियों की पवित्र माला से जाप करते हुए देखते हैं। दरअसल, मंत्र जप केवल शब्दों का साधारण उच्चारण मात्र नहीं है, बल्कि यह साक्षात ईश्वर के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने का सबसे सरल जरिया है।

भगवद् गीता में छिपा है भक्ति का सबसे बड़ा रहस्य

भगवान श्रीकृष्ण ने पवित्र भगवद् गीता में कहा है कि वे सच्चे मन और अटूट भक्ति के साथ अर्पित किए गए पत्ते, सुंदर फूल, फल या केवल जल को भी सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं। इसी प्रकार, एकाग्र मन से किया गया मंत्र जप भी ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम और गहरी भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

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शास्त्रों के अनुसार त्रेता और द्वापर युग में भगवान को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या और बड़े-बड़े यज्ञ किए जाते थे। लेकिन घोर कलियुग में प्रभु के नाम का जप ही सबसे उत्तम और कल्याणकारी माध्यम माना गया है। यदि कोई मनुष्य एकाग्र होकर एक घंटे भी जप कर ले, तो उसे परम दिव्य अनुभूति होने लगती है।

रुद्राक्ष की दिव्य माला से बरसती है भोलेनाथ की कृपा

सनातन परंपरा में कलियुग के दौरान मंत्र जप करने के लिए मुख्य रूप से 4 तरह की विशेष मालाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें सबसे पहली और अत्यंत प्रभावी है रुद्राक्ष की माला। ऐसी दृढ़ मान्यता है कि रुद्राक्ष की पवित्र माला से किया गया जाप सीधे महादेव शिव की प्रत्यक्ष और असीम कृपा दिलाता है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार रुद्राक्ष की माला को श्रद्धापूर्वक धारण करने से मनुष्य की अकाल मृत्यु के संकट से रक्षा होती है। इसके प्रभाव से भोलेनाथ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं तुरंत पूरी करते हैं। हालांकि, इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इंसान के कर्म और आचरण भी पूरी तरह से शुद्ध और सात्विक हों।

क्रिस्टल माला से जागृत होती हैं इंसान की गुप्त शक्तियां

मंत्र साधना के विज्ञान में क्रिस्टल यानी स्फटिक की माला को बहुत विशेष स्थान दिया गया है। जानकारों के अनुसार यह क्रिस्टल माला साधक को कई तरह की अद्भुत और चमत्कारी शक्तियां प्रदान करती है। इसे धारण करने से मनुष्य के भीतर दूसरों के मन की बात को आसानी से समझने की क्षमता विकसित हो जाती है।

तकनीकी और आध्यात्मिक रूप से, इस माला के नियमित प्रयोग से व्यक्ति के भीतर बहुत ही विशेष ऊर्जा प्रकट होती है। इसके बाद नंबर आता है श्रीहरि को प्रिय तुलसी की माला का। भगवान विष्णु को तुलसी की पवित्र माला सबसे ज्यादा प्रिय है। इस चमत्कारी माला को समाज के सभी वर्गों के लोग आसानी से धारण कर सकते हैं।

तुलसी माला धारण करने से मिलता है अश्वमेध यज्ञ का फल

आजकल इस्कॉन जैसे वैश्विक संस्थानों में हर उम्र के श्रद्धालु तुलसी की माला धारण करते और इससे निरंतर मंत्र जाप करते हुए देखे जा सकते हैं। तुलसी की माला श्रीहरि विष्णु की असीम कृपा लाती है। यह मनुष्य को सात्विक जीवन जीने के लिए जरूरी मानसिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करती है।

पवित्र पद्म पुराण के अनुसार, यदि कोई मनुष्य कम से कम 108 दिनों तक तुलसी की माला को अपने गले में पूरी पवित्रता से धारण करता है, तो उसे प्राचीन काल के महान अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह माला जीवन से सभी प्रकार के मानसिक विकारों और नकारात्मक विचारों को पूरी तरह दूर कर देती है।

कमलगट्टे की माला से खिंची चली आती हैं मां लक्ष्मी

चौथी सबसे महत्वपूर्ण माला है कमलमणि या कमल के बीज की माला, जिसे कमलगट्टे की माला भी कहा जाता है। यह माला धन की देवी महालक्ष्मी को सबसे ज्यादा प्रिय है। इस विशेष माला से नियमित जप करने से शत्रुओं का पूरी तरह नाश होता है और इंसान को गंभीर दृष्टि दोषों से मुक्ति मिलती है।

कमलमणि की माला के प्रभाव से आसपास मौजूद हर तरह की भयानक निगेटिव एनर्जी तुरंत दूर भाग जाती है। इस माला को धारण करने या इससे लक्ष्मी मंत्रों का नियमित जाप करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए यह माला किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती है।

Pandit Balkrishan Sharma

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