हिमाचल के 14 गांवों में चुनाव का संपूर्ण बहिष्कार, 25 साल से सड़क को तरस रहे ग्रामीणों ने नेताओं की नो एंट्री का किया ऐलान

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में एक बड़ा चुनावी विवाद खड़ा हो गया है। यहां पिन वैली के चौदह गांवों ने आगामी पंचायत चुनावों के संपूर्ण बहिष्कार का सख्त ऐलान कर दिया है। ग्रामीण लंबे समय से एक अहम सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। पिछले पच्चीस सालों से उनकी इस जायज मांग को लगातार अनसुना किया जा रहा है। अब ग्रामीणों का गुस्सा पूरी तरह फूट पड़ा है। उन्होंने नेताओं के प्रवेश पर रोक लगा दी है।

राजनीतिक दलों के प्रचार पर लगाई कड़ी रोक

क्षेत्र के नंबरदारों ने एक अहम बैठक में चुनाव बहिष्कार का कड़ा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। कोठी नंबरदार एसपी बोध ने इस खास बैठक की अध्यक्षता की। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि वे नेताओं को गांव में नहीं घुसने देंगे। जब तक सड़क निर्माण का काम जमीन पर शुरू नहीं होता, चुनाव प्रचार पूरी तरह से बंद रहेगा। लोगों ने अपने कड़े फैसले का एक औपचारिक ज्ञापन प्रशासन को भी सौंप दिया है।

कागजों में अटकी है 64 किलोमीटर लंबी सड़क

अत्तारगू मुद से किन्नौर के भाभा नगर को जोड़ने वाली यह सड़क करीब 64 किलोमीटर लंबी है। ग्रामीण कुन्जंग गातुक का कहना है कि यह सड़क उनके लिए जीवन रेखा है। सड़क न होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के जीवन में भारी मुश्किलें उठानी पड़ती हैं। लोग पच्चीस सालों से केवल खोखले आश्वासन ही सुन रहे हैं। यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का भी पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

वन विभाग की मंजूरी में फंसा 99 करोड़ का प्रोजेक्ट

लोक निर्माण विभाग ने इस अहम सड़क के लिए 99 करोड़ रुपये की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा किन्नौर जिले के अंतर्गत आता है। वहां वन विभाग से जरूरी मंजूरी मिलना अभी तक बाकी है। इसी तकनीकी अड़चन के कारण यह प्रोजेक्ट इतने सालों से अटका पड़ा है। स्थानीय विधायक अनुराधा राणा ने इस गंभीर मुद्दे को राज्य विधानसभा में दो बार मजबूती के साथ उठाया है।

सामरिक दृष्टि से अहम मार्ग और प्रशासन की पहल

सरकार अब इस सामरिक मार्ग को सीमा सड़क संगठन को सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह सड़क शिमला और पिन घाटी के बीच की दूरी सौ किलोमीटर तक कम कर देगी। इससे स्थानीय पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, एडीसी काजा शिखा सिम्तिया ने ग्रामीणों का ज्ञापन मिलने की पुष्टि कर दी है। वह समस्या का ठोस समाधान निकालने के लिए तीस अप्रैल को नाराज ग्रामीणों के साथ एक विशेष बैठक करेंगी।

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