Himachal Panchayat Election: क्या हार के डर से पंचायत चुनाव टाल रही कांग्रेस? BJP सांसद ने खोल दी सरकार की पोल

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासत काफी गर्मा गई है। प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल खत्म हुए कई महीने बीत चुके हैं। राज्य सरकार ने अभी तक नए चुनावों की कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है। विपक्षी दल भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने सरकार पर जानबूझकर चुनाव टालने का आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस सरकार चुनाव में अपनी हार से डरी हुई है।

चुनाव टालकर प्रशासक राज लाना चाहती है सरकार

शनिवार को डॉ. सिकंदर कुमार ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के बजाय प्रदेश में प्रशासक राज लाना चाहती है। सरकार प्रशासकों के जरिए सीधे तौर पर ग्राम पंचायतों को नियंत्रित करना चाहती है। यह कदम पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के बिल्कुल खिलाफ है। सांसद ने कहा कि इससे लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई बहुत प्रभावित हो रही है। सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सरेआम कमजोर कर रही है।

हार के डर से ग्रामीण इलाकों में चुनाव से भाग रही कांग्रेस

सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के खिलाफ भारी असंतोष बढ़ रहा है। जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों से पूरी तरह से नाराज है। अपनी इसी घटती लोकप्रियता के डर से सरकार पंचायत चुनाव कराने से बच रही है। पंचायतें गांवों के विकास की मुख्य धुरी होती हैं। चुनाव न होने से गांवों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। सरकार जमीनी स्तर पर जनता का सामना करने से बुरी तरह घबरा रही है।

आरक्षण रोस्टर में अपनी सुविधा के अनुसार मनमाना बदलाव

भाजपा ने सरकार पर पंचायत आरक्षण रोस्टर में भारी छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार रोस्टर को बदल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मजबूत संभावित उम्मीदवारों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखना है। सरकार राजनीतिक लाभ के लिए पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल कर रही है। सांसद ने इसे प्रशासनिक स्तर पर एक बेहद अनुचित कदम बताया है। यह कदम चुनाव की पारदर्शिता को बिल्कुल खत्म कर देगा।

दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकार छीनने की रची जा रही साजिश

भाजपा महासचिव ने रोस्टर में इस बदलाव को दलितों और पिछड़ों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि इन गलत फैसलों के जरिए सरकार आरक्षित वर्गों के अधिकारों को छीन रही है। सरकार जानबूझकर पुराने आंकड़ों के आधार पर फैसले ले रही है। मनमाने फैसलों से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी राजनीतिक असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाएगी। वंचित वर्ग को पंचायत चुनाव में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा। यह संविधान द्वारा दिए गए लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

महिलाओं को पंद्रह सौ रुपये देने का चुनावी वादा साबित हुआ झूठा

चुनाव टालने के पीछे भाजपा ने सरकार की भारी विफलताओं को जिम्मेदार बताया है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले झूठे वादे किए थे। महिलाओं को हर महीने पंद्रह सौ रुपये देने का वादा आज तक अधूरा है। इस महत्वपूर्ण योजना पर अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। महिलाएं खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। ग्रामीण जनता का यह गुस्सा पंचायत चुनावों में कांग्रेस पार्टी पर भारी पड़ सकता है।

युवाओं को रोजगार देने में भी पूरी तरह नाकाम रही सरकार

महिलाओं के साथ-साथ सरकार युवाओं के मोर्चे पर भी बुरी तरह विफल रही है। भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस ने लाखों युवाओं को रोजगार देने का बड़ा सपना दिखाया था। सत्ता में आने के बाद सरकार अपने इस अहम वादे को भूल गई है। प्रदेश के युवा वर्ग में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर भारी निराशा और आक्रोश है। सरकार अपनी इन्हीं नाकामियों को जनता से छिपाने के लिए पंचायत चुनावों को टालने का लगातार प्रयास कर रही है।

पंचायत चुनाव के मुद्दे को जनता के बीच जोर शोर से उठाएगी भाजपा

भाजपा ने पंचायत चुनाव में देरी के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का ऐलान किया है। डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि पार्टी सरकार के इस तानाशाही रवैये का कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कोई नया काम नहीं किया है। अपनी इसी विफलता के कारण सरकार अब गलत तरीकों से पंचायतों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।

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