हिमाचल के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों का 20 साल का वनवास होगा खत्म? सीएम सुक्खू ने लिया बड़ा फैसला

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए एक स्थायी नीति बनाने की दिशा में अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस संवेदनशील मामले पर गहरी गंभीरता दिखाई है। उन्होंने संबंधित विभागों से इस नीति को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव तुरंत मांगा है। अब कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है।

बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने उठाया बड़ा मुद्दा

यह पूरी प्रक्रिया उस समय और तेज हो गई, जब बिजली बोर्ड आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी तमाम समस्याओं और जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि वे पिछले पंद्रह से बीस वर्षों से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इतने लंबे संघर्ष और समर्पण के बावजूद उन्हें बहुत कम वेतन मिल रहा है।

हादसों का शिकार हुए कई बेबस कर्मचारी

कर्मचारी संघ ने सरकार को जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए कई बेहद दर्दनाक पहलू भी सामने रखे हैं। सरकारी ड्यूटी करते समय अब तक कई होनहार कर्मचारियों ने अपनी अनमोल जान गंवा दी है। इसके अलावा कई कर्मचारी गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार होकर जीवन भर के लिए दिव्यांग हो चुके हैं। इतनी बड़ी कुर्बानियों के बाद भी इन बेबस कर्मचारियों के भविष्य की कोई ठोस सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई है। उनके आश्रित परिवारों का सहारा नहीं है।

कार्मिक विभाग ने शुरू की डाटा जुटाने की कसरत

इस गंभीर विषय को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत बड़ा एक्शन लिया है। विशेष सचिव ने यह पूरा मामला सीधे सचिव कार्मिक को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिया है। अब कार्मिक विभाग के स्तर पर नई नीति के निर्माण की प्रारंभिक कसरत जोर-शोर से शुरू हो चुकी है। सभी विभागों से आउटसोर्स पर काम कर रहे कर्मचारियों का पूरा डाटा तेजी से जुटाया जा रहा है। उनकी सेवा शर्तों की समीक्षा शुरू होगी।

नौकरी की सुरक्षा और मुआवजे की मुख्य मांग

कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार के सामने अपनी कई महत्वपूर्ण और जायज मांगें प्रमुखता से रखी हैं। इनमें सभी कर्मचारियों की नौकरी की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे अहम है। इसके अलावा न्यूनतम वेतन लागू करने और मृत्यु होने पर परिजनों को सरकारी नौकरी देने की मांग शामिल है। बिजली बोर्ड संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह संयोजक सोहनलाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सरकार से सकारात्मक निर्णय की पूर्ण उम्मीद जताई है।

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