Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को करारा झटका दिया है। अदालत ने कांग्रेस के छह बागी विधायकों को बड़ी राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन अयोग्य घोषित विधायकों की रुकी हुई पेंशन तुरंत बहाल करने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने विधानसभा सचिवालय को एक महीने के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दी सख्त चेतावनी
जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की पीठ ने यह बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि समय पर आदेश का पालन नहीं हुआ तो सरकार को हर्जाना देना होगा। देरी होने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा। राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर ने यह याचिका दायर की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने इन विधायकों को अयोग्य ठहराकर पेंशन रोक दी थी। अदालत के इस आदेश से सभी पूर्व विधायकों को अब बड़ी कानूनी और आर्थिक राहत मिल गई है।
भाजपा ने सुक्खू सरकार की मंशा पर उठाए बड़े सवाल
अदालत का फैसला आते ही भाजपा ने सुक्खू सरकार पर सीधा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने कहा कि सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने विपक्ष को लगातार निशाना बनाया है। यह फैसला कांग्रेस के राजनीतिक एजेंडे पर करारा प्रहार है। आशीष शर्मा ने कहा कि कानून हमेशा भविष्य के लिए बनाए जाते हैं। किसी व्यक्ति को टारगेट करने के लिए कानून का दुरुपयोग बिल्कुल गलत है।
पेंशन रोकने वाले बिल को कोर्ट ने बताया असंवैधानिक
कांग्रेस सरकार ने बागी विधायकों की पेंशन रोकने के लिए 2024 में संशोधन बिल पेश किया था। इस विवादित बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई थी। इसके बाद सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ। साल 2026 के बजट सत्र में सरकार ने नया संशोधन पेश किया। यह नया बिल सिर्फ चौदहवीं विधानसभा और भविष्य के विधायकों पर लागू होगा। भाजपा का कहना है कि यह कदम सरकार की पुरानी और असंवैधानिक मंशा को खुद ही पूरी तरह से उजागर कर देता है।
राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ था यह राजनीतिक घमासान
विवाद की शुरुआत फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव से हुई थी। कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी के खिलाफ क्रॉस वोटिंग की थी। बगावत के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सख्त कदम उठाया था। उन्होंने तुरंत प्रभाव से सभी बागी विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था। सदस्यता खत्म होने के बाद इन नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया। इसी घटना के बाद सरकार ने इनकी पेंशन रोकने का खेल शुरू किया था।
लोकतंत्र नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का है सीधा उदाहरण
भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने दो वर्षों तक पूर्व विधायकों को प्रताड़ित किया। नेताओं को वैध पेंशन पाने के लिए अदालतों के लंबे चक्कर काटने पड़े। आशीष शर्मा ने इसे लोकतंत्र के बजाय शुद्ध राजनीतिक प्रतिशोध का बड़ा उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि दसवीं अनुसूची का गलत इस्तेमाल करते हुए यह पेंशन रोकी गई थी। यह नियम केवल सदस्यता समाप्ति तक ही सीमित होता है। अदालत ने साफ कर दिया है कि कानून के साथ कोई मनमानी बिल्कुल नहीं चलेगी।
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू को दी बड़ी नसीहत
हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने भी अपनी अहम प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले ने सरकार की तानाशाही दुनिया के सामने रख दी है। पूर्व विधायकों की पेंशन बहाली असल में न्याय की जीत और अहंकार की हार है। उन्होंने मुख्यमंत्री को राजनीतिक प्रतिशोध छोड़कर राज्य के विकास पर काम करने की सलाह दी है। भाजपा अब इस पूरे मुद्दे को प्रदेश की जनता के बीच जोर शोर से लेकर जाएगी।


