Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ‘ऑन-स्पॉट’ एक्शन को महज एक राजनीतिक स्टंट करार दिया। उन्होंने कांगड़ा के ढगवार में निर्माणाधीन 225 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट में हुई देरी पर सवाल उठाए। जयराम ठाकुर के मुताबिक, धरातल पर सरकार की स्थिति बेहद निराशाजनक है और विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।
मिल्क प्लांट निरीक्षण: अधिकारियों पर बरसने को बताया ड्रामा
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण और अधिकारियों पर नाराजगी जताने को ढोंग बताया। उन्होंने पूछा कि जिस प्रोजेक्ट को फरवरी तक पूरा होना था, उसकी सुध अप्रैल में क्यों ली जा रही है? क्या कई महीनों से इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की कोई निगरानी नहीं हो रही थी? मुख्यमंत्री का यह दावा कि अधिकारियों ने उनकी बात नहीं मानी, उनकी प्रशासनिक कमजोरी दिखाता है। ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया पर रौद्र रूप दिखाना केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
प्रशासनिक पकड़ पर सवाल: मुख्यमंत्री की बातों की अहमियत नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की उनके ही विभाग में कोई अहमियत नहीं बची है। सुक्खू का यह कहना कि उन्होंने ऑटोमैटिक प्लांट मांगा था और मैनुअल तकनीक लगा दी गई, काफी चौंकाने वाला है। जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि शासन पर मुख्यमंत्री का कोई नियंत्रण नहीं है। अधिकारी अपनी मनमर्जी कर रहे हैं और मुख्यमंत्री केवल निरीक्षण के नाम पर सुर्खियां बटोरने में व्यस्त हैं।
पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की जमीन पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की बेशकीमती जमीन को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के मामले पर भी ठाकुर ने सरकार को घेरा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करने पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पहले ही आगाह किया था कि यह फैसला गैर-कानूनी है। विश्वविद्यालय की जमीन को व्यावसायिक उपयोग के लिए डायवर्ट करने की योजना कानून की कसौटी पर कभी नहीं टिक पाएगी।
सरकार को दी चेतावनी: कानून के खिलाफ न जाएं सुक्खू
जयराम ठाकुर ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि जनहित के संस्थानों की संपत्तियों से छेड़छाड़ बंद होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के बजाय केवल संपत्तियों को बेचने या डायवर्ट करने में रुचि दिखा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस तरह के जनविरोधी फैसलों का विरोध जारी रखेगी। हिमाचल की जनता देख रही है कि कैसे एक के बाद एक प्रोजेक्ट्स भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता की भेंट चढ़ रहे हैं।


