रामपुर पोक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कठोर कैद

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Rampur News: हिमाचल प्रदेश के रामपुर स्थित विशेष पोक्सो कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के दोषी ललित मोहन को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 10,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

नवंबर 2022 में हुई थी यह दर्दनाक वारदात

मामले की जानकारी देते हुए उप-जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने बताया कि घटना साल 2022 की है। तब पीड़िता केवल 14 वर्ष की थी और नौवीं कक्षा में पढ़ती थी। नवंबर महीने में वह स्कूल के मैदान में अपनी सहेलियों के साथ बैठी हुई थी।

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उसी समय पांगी गांव का रहने वाला आरोपी ललित मोहन वहां अपनी गाड़ी लेकर आया। वह पीड़िता और उसकी सहेलियों को घुमाने के बहाने जबरन गाड़ी में ले गया। गाड़ी में दो अन्य व्यक्ति पहले से ही मौजूद थे, जिन्होंने आरोपी की मदद की।

सहेलियों को उतारकर सुनसान जगह ले गया आरोपी

आरोपी ने कुछ दूर जाने के बाद पीड़िता की सहेलियों को गाड़ी से नीचे उतार दिया। इसके बाद वह नाबालिग पीड़िता को जबरन काशंग नाला की तरफ ले गया। वहां सुनसान जगह पर आरोपी ने गाड़ी के भीतर ही पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया।

डरी-सहमी पीड़िता ने लोकलाज और खौफ के कारण इस घिनौनी वारदात के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। दिसंबर 2022 में जब पीड़िता के पेट में अचानक तेज दर्द हुआ, तब उसकी माता उसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले गईं।

अस्पताल में टेस्ट के बाद हुआ बड़ा खुलासा

अस्पताल में डॉक्टरों ने जब पीड़िता का प्रेगनेंसी टेस्ट किया तो वह पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद डॉक्टर ने तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को मामले की सूचना दी। माता के कड़ाई से पूछने पर पीड़िता ने रोते हुए सारी सच्चाई बयां कर दी।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस थाना रिकांगपिओ में आरोपी के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान पीड़िता के पेट में पल रहे भ्रूण और आरोपी का डीएनए टेस्ट करवाया, जो पूरी तरह मैच हो गया।

डीएनए रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने सुनाई सजा

डीएनए रिपोर्ट से वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो गया कि आरोपी ही उस भ्रूण का बायोलॉजिकल पिता था। रामपुर की अदालत ने सभी पुख्ता साक्ष्यों और अचूक डीएनए रिजल्ट को मुख्य आधार मानते हुए दोषी ललित मोहन को यह कड़ी सजा सुनाई है।

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