Shimla News: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने वंदे मातरम् को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी से पहले वंदे मातरम् ही भारत का वास्तविक राष्ट्रीय गान था। किस स्तर पर साजिश के तहत इसे बदला गया, इस पर गहरे चिंतन की जरूरत है।
राज्यपाल ने कहा कि अगर हमारे इतिहास से छेड़छाड़ नहीं की जाती, तो अन्य गीतों की तरह लोगों को यह पूरा याद होता। वे शिमला के प्रसिद्ध भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान यानी एडवांस्ड स्टडी में शुक्रवार को आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
खराब मौसम के कारण उपराष्ट्रपति का दौरा रद्द
यह भव्य आयोजन वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस दौरान देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का एक विशेष वीडियो मैसेज भी स्क्रीन पर दिखाया गया।
उपराष्ट्रपति ने खुद इस लाइव प्रोग्राम में शामिल होने के लिए शिमला आना था। हालांकि, पहाड़ों में मौसम प्रतिकूल होने के कारण गुरुवार को उनका यह ऑफिशियल दौरा अचानक रद्द हो गया। इस कॉन्फ्रेंस में देश भर से नामी इतिहासकार और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि यह सेमिनार सरदार पटेल के एडमिनिस्ट्रेटिव विजन, को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म के कांसेप्ट और ग्लोबल चैलेंजेस पर गंभीर चर्चा करेगा। वंदे मातरम् केवल एक सामान्य गीत नहीं है, बल्कि यह देश के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी प्रेरणा रहा है।
सरदार पटेल की विरासत पर रिसर्च की मांग
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि इस गौरवशाली गीत के सही इतिहास को न्यू जनरेशन तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। वंदे मातरम् और सरदार पटेल की राष्ट्र निर्माण की विरासत पर बड़े स्तर पर रिसर्च पेपर्स लिखे जाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां रियल फैक्ट्स जान सकें।
उन्होंने कहा कि इतिहास को हमेशा सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। देश की धरोहर से जुड़े ऐसे संवेदनशील विषयों पर किसी भी प्रकार की राजनीति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने एक खास काव्य संग्रह का विमोचन किया।
राज्यपाल ने वंदे मातरम् पर बेस्ड एक प्रीमियम कॉफी टेबल बुक और ‘दर्शन ऑफ राधाकृष्णन: इटरनल एंड टेम्पोरल’ विषयक संगोष्ठी कार्यवाही जारी की। साथ ही उन्होंने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर आधारित एक बहुभाषी काव्य संग्रह का भी ऑफिशियल विमोचन किया।
130 साल पुराने ग्रामोफोन पर गूंजा वंदे मातरम्
इसके बाद उन्होंने ‘वंदे मातरम्: एक यात्रा’ नामक एक विशेष एग्जिबिशन का बारीकी से अवलोकन किया। इस पूरी प्रदर्शनी की थीम प्लानिंग और क्यूरेशन प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं लेखक अखिलेश झा ने की है, जबकि रश्मिता झा ने बतौर सह-क्यूरेटर अपना योगदान दिया है।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी में आजादी के आंदोलन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स, आर्काइव डॉक्यूमेंट्स और पुरानी ऐतिहासिक सामग्रियां डिस्प्ले की गई हैं। संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि संगोष्ठी में कई महत्वपूर्ण एकेडमिक सेशन्स आयोजित होंगे।
इस इवेंट की सबसे बड़ी हाइलाइट यह रही कि वहां एक 130 साल पुराने विंटेज ग्रामोफोन में वंदे मातरम् गीत बजाया गया। सेंटर फॉर ग्रामोफोन एंड एलाइड स्टडीज के फाउंडर अखिलेश झा ने दावा किया कि इन दुर्लभ अभिलेखों से साबित होता है कि यह गीत ही राष्ट्रीय गान था।

