हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए शुरू किया हाई वैल्यू नट मिशन

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने बागवानी को मजबूत करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के मकसद से वर्ष 2031 तक हाई वैल्यू नट मिशन शुरू करने का फैसला किया है। इस मिशन के तहत अखरोट, बादाम, खुमानी और चिलगोजा जैसी समशीतोष्ण नट फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। सरकार पुराने बागों का कायाकल्प करेगी और आधुनिक तकनीक से उत्पादन बढ़ाएगी।

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सरकार का कहना है कि राज्य में कई पुराने बाग अब कम फल दे रहे हैं। कटाई के बाद भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार पहुंच की सुविधाएं भी कमजोर हैं। हाई वैल्यू नट मिशन इन समस्याओं का समाधान करेगा। योजना में वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, आधुनिक तरीके और बेहतर विपणन व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जाएगा। इससे किसान अपनी उपज के सही दाम पा सकेंगे।

इस मिशन के अंतर्गत करीब एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा। इसमें 900 हेक्टेयर पुराने बागों का वैज्ञानिक कायाकल्प होगा। कैनोपी प्रबंधन, टॉप वर्किंग, पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे लगाना, मिट्टी सुधार और जल प्रबंधन जैसी तकनीकें अपनाई जाएंगी। साथ ही 100 हेक्टेयर में उच्च घनत्व वाले नए मॉडल बाग विकसित किए जाएंगे।

उच्च घनत्व बाग और आधुनिक नर्सरी

नए बागों में अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली और स्थानीय जलवायु के अनुकूल खेती पर जोर रहेगा। प्रमाणित और रोगमुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रमुख नट उत्पादक इलाकों में चार हाई टेक नर्सरियां और दो उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों में अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रदर्शन और विस्तार सेवाएं उपलब्ध होंगी।

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बागवान इन केंद्रों से नई तकनीकों की जानकारी हासिल कर सकेंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा और गुणवत्ता में सुधार होगा। हिमाचल प्रदेश में समशीतोष्ण नट फसलों की अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य सरकार आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध सामग्री और मजबूत आधारभूत ढांचे के जरिए किसानों को लाभ पहुंचाएगी।

चिलगोजा संरक्षण पर विशेष फोकस

मिशन में चिलगोजा के संरक्षण और पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी गई है। जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा दिया जाएगा। समुदाय आधारित वन प्रबंधन मजबूत होगा। चिलगोजा बीजों के अंकुरण के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे जैव विविधता बचेगी और स्थानीय लोगों को आजीविका के नए अवसर मिलेंगे।

हिमाचल प्रदेश में नट फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए यह मिशन महत्वपूर्ण कदम है। राज्य में पहले से अखरोट और बादाम जैसी फसलें उगाई जाती हैं। लेकिन उत्पादकता बढ़ाने और बाजार सुधार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस मिशन से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह मिशन बागवानी क्षेत्र में विकास, विविधीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा प्रयास है। उन्होंने जोर दिया कि हिमाचल में समशीतोष्ण नट फसलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। सरकार बागों के कायाकल्प, मूल्य वृद्धि, ब्रांडिंग और निर्यात को भी बढ़ावा देगी।

हिमाचल प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं जैसे एचपी शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से सबट्रॉपिकल फलों के साथ नट फसलों को भी मजबूत कर रही है। उच्च घनत्व रोपण और जल प्रबंधन से किसान कम जगह में ज्यादा उत्पादन ले सकेंगे।

नट फसलें पौष्टिक होती हैं और बाजार में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है। अखरोट, बादाम और खुमानी जैसे उत्पादों का प्रसंस्करण बढ़ाने से किसानों को अतिरिक्त आय होगी। सरकार बाजार लिंकेज और निर्यात सुविधाओं पर भी काम करेगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खास फायदा पहुंचेगा।

मिशन के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बागवान नई तकनीकों से जुड़ेंगे। मिट्टी परीक्षण, कीट प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे विषयों पर फोकस रहेगा। पुराने बागों को नया जीवन देकर राज्य नट उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर होगा।

चिलगोजा हिमालयी क्षेत्र की अनोखी फसल है। इसका संरक्षण पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए जरूरी है। जनजातीय समुदायों को इसमें शामिल करके सरकार समावेशी विकास सुनिश्चित कर रही है।

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