हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी मंदिरों के लिए जारी किया नया एसओपी, दान और सुरक्षा व्यवस्था को बनाया पूरी तरह फूलप्रूफ

Shimla News: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य के सभी सरकारी नियंत्रण वाले धार्मिक स्थलों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मंदिरों की सुरक्षा, पारदर्शिता और मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी जारी किया है।

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। हिमाचल के भाषा, कला और संस्कृति विभाग ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर यह एडवांस एहतियाती कदम उठाया है ताकि यहां कोई गड़बड़ी न हो।

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री का बड़ा बयान

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में इस नए फैसले की पूरी जानकारी दी। उनके पास राज्य के सरकारी मंदिरों की देखरेख करने वाले संस्कृति विभाग का कार्यभार भी है। उन्होंने बताया कि यह गाइडलाइंस एक प्रिकॉशनरी स्टेप के तौर पर तुरंत तैयार की गई है।

मुकेश अग्निहोत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार ने सभी मंदिरों के लिए एक डिटेल्ड रोडमैप बना लिया है। उन्होंने कहा कि पूरा डॉक्यूमेंट स्टडी के लिए विभाग से लिया जा सकता है। सरकार ने पूरे सिस्टम को पूरी तरह से फूलप्रूफ और सिक्योर बना दिया है।

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डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि चोरी की घटना भले ही किसी दूसरे राज्य में हुई हो, लेकिन हमने अपने यहां कड़े कदम पहले ही उठा लिए हैं। हिमाचल प्रदेश के किसी भी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर ऐसी कोई भी अप्रिय घटना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

धार्मिक संस्थानों का होगा मॉडर्नाइजेशन

राज्य सरकार हिमाचल के सभी सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थानों के मॉडर्नाइजेशन पर भी तेजी से काम कर रही है। इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत विश्व स्तरीय डिजिटल म्यूजियम का विकास भी शामिल है। इसके साथ ही मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन को भी पूरी तरह अकाउंटेबल बनाया गया है।

इस नए एसओपी का मुख्य उद्देश्य चढ़ावे, गोल्ड, कीमती सामान और अन्य संपत्तियों के मैनेजमेंट में 100 फीसदी ट्रांसपेरेंसी लाना है। राम मंदिर की घटना के बाद सरकार ने समय रहते एक्टिव होकर यह न्यू सिक्योरिटी सिस्टम राज्य भर में लागू किया है।

यह एसओपी मंदिर अधिकारियों के लिए कड़े ऑपरेशनल दिशा-निर्देश तय करता है। इसका सीधा लक्ष्य रिकॉर्ड-कीपिंग को ऑनलाइन सुधारना और मंदिर के डोनेशन मैनेजमेंट को जवाबदेह बनाना है। भाषा और संस्कृति विभाग को भरोसा है कि इन उपायों से भक्तों का विश्वास और बढ़ेगा।

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