Dharamshala News: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा टारगेट सेट किया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के टोटल फॉरेस्ट कवर यानी वन आवरण को 28 फीसदी से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
इस ग्रीन टारगेट को हासिल करने के लिए वन विभाग ने एक स्पेशल प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के जरिए बड़े स्केल पर प्लांटेशन यानी पौधरोपण का काम किया जा रहा है। सरकार इस मुहिम को लेकर काफी सीरियस दिख रही है।
ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार का नया मौका
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अनुसार, इस सरकारी योजना का एकमात्र मोटिव केवल नए पौधे लगाना ही नहीं है। इसके साथ ही लोकल विलेजर्स को सीधे वन संरक्षण से जोड़ना भी इसका मुख्य हिस्सा है। इससे रूरल एरियाज में एम्प्लॉयमेंट यानी रोजगार के नए अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।
इस बड़े अभियान को कामयाब बनाने के लिए महिला मंडलों और यूथ क्लब्स की एक्टिव भागीदारी तय की जा रही है। इसके साथ ही सेल्फ हेल्प ग्रुप्स यानी स्वयं सहायता समूहों को भी इस सरकारी सोशल फॉरेस्ट्री प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर जोड़ा जा रहा है।
धर्मशाला के पास स्थित घुरकड़ी गांव की महिलाएं इस योजना में बहुत ही बेहतरीन रोल प्ले कर रही हैं। यहां के लोकल स्वयं सहायता समूह ‘ओम नमो नारायण’ की महिलाओं ने मिलकर बंजर जमीन पर हरियाली लाने का एक बड़ा और सफल जिम्मा अपने हाथों में लिया है।
महिलाओं ने लगाए 1,600 से ज्यादा पौधे
ग्रुप की हेड आशा देवी और उनकी साथी अनीता कुमारी, अरुणा और पुष्पा ने बताया कि वन विभाग ने उन्हें दो हेक्टेयर का एरिया अलॉट किया था। महिलाओं ने सबसे पहले वहां उगी जंगली झाड़ियों को साफ किया। फिर जमीन की फेंसिंग करके 1,600 से अधिक पौधे लगाए।
महिलाओं ने बताया कि उन्होंने जंगली जानवरों से छोटे पौधों को सेफ रखने के लिए कुछ ट्रेडिशनल होम रेमेडीज यानी पारंपरिक घरेलू नुस्खे अपनाए। इन देसी उपायों के बहुत ही शानदार रिजल्ट्स मिले। आज उनके द्वारा रोपे गए अधिकांश पौधे पूरी तरह सुरक्षित और हरे-भरे हैं।
धर्मशाला के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर यानी डीएफओ अमित कुमार ने इस संबंध में अहम डेटा शेयर किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल इस पूरे फॉरेस्ट डिवीजन के अंतर्गत करीब 28 हेक्टेयर भूमि पर 22 हजार से ज्यादा नए पौधे लगाए गए थे।
बेहतर रख-रखाव पर मिलेगा नकद कैश प्राइज
डीएफओ ने बताया कि इस सरकारी स्कीम की सबसे अच्छी बात इसकी मॉनिटरिंग सिस्टम है। सिर्फ पौधे लगाने से काम पूरा नहीं माना जाता। इसके अगले साल पौधों के सर्वाइवल रेट यानी जीवित रहने की दर का एक ऑफिशियल असेसमेंट या मूल्यांकन किया जाता है।
अगर पौधों का रख-रखाव और प्रोटेक्शन बहुत बढ़िया पाया जाता है, तो उस ग्रुप को गवर्नमेंट की तरफ से प्रोत्साहन राशि मिलती है। सरकार की तरफ से उस महिला मंडल या ग्रुप को एक लाख रुपए तक का कैश प्राइज यानी सम्मान राशि देने का नियम है।
इस साल विभाग ने इस प्लांटेशन ड्राइव का दायरा और ज्यादा बढ़ा दिया है। धर्मशाला वन मंडल ने इस बार 17 महिला मंडलों, 6 यूथ क्लब्स और 5 सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को शॉर्टलिस्ट किया है। यह ग्रीन कैंपेन धर्मशाला, शाहपुर और कांगड़ा के एरियाज में चलाया जाएगा।
इस पूरे ड्राइव के दौरान हरड़, बेहड़ा और आंवला जैसी औषधीय और फ्रूट वैरायटी यानी फलदार पौधों को पहली प्रायोरिटी दी जा रही है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को उम्मीद है कि इस साल 3,000 से ज्यादा महिलाएं इस मुहिम से जुड़कर पर्यावरण की रक्षा करेंगी।

