Faridabad News: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि केवल धमकियों के आरोपों के आधार पर किसी को पुलिस सुरक्षा का अधिकार नहीं मिल जाता। सक्षम पुलिस अधिकारी की जांच रिपोर्ट में ठोस सबूत न मिलने पर अदालत इस मामले में कोई दखल नहीं देगी।
जस्टिस मनीषा बत्रा ने फरीदाबाद के एक मामले की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत हाई कोर्ट की भूमिका केवल सुपरवाइजर की है। अदालत किसी अपीलीय अदालत की तरह तथ्यों का दोबारा मूल्यांकन बिल्कुल नहीं कर सकती है।
पुलिस जांच में नहीं मिले धमकी के स्वतंत्र सबूत
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि एक एजीपी स्तर के अधिकारी ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की है। जांच में यह सच सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद है। याचिकाकर्ता के पास पहले से ही आत्मरक्षा के लिए अपना एक वैध लाइसेंसी हथियार भी मौजूद है।
फरीदाबाद के याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीनियर अफसरों की देखरेख में एसआईटी गठन और सुरक्षा की मांग की थी। उनका दावा था कि पड़ोसी उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने पुलिस पर कार्रवाई न करके समझौते का दबाव बनाने का आरोप लगाया था।

