उत्तराखंड मौसम अपडेट: पश्चिमी विक्षोभ के चलते मई में भी फरवरी जैसी ठंड, पांच जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी

Dehradun News: उत्तराखंड में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ है। राजधानी देहरादून में गुरुवार को कई दिनों बाद सुबह चटख धूप खिली, लेकिन शाम होते ही बादलों ने फिर डेरा डाल लिया। तेज हवाओं के साथ हुई झमाझम बारिश ने तापमान में भारी गिरावट ला दी है। मई के महीने में सुबह-शाम होने वाली ठिठुरन ने लोगों को फरवरी की याद दिला दी है।

पहाड़ों में कड़ाके की ठंड और ओलावृष्टि का कहर

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही रुक-रुक कर वर्षा से जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऊँचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे स्थानीय लोग और तीर्थयात्री बेहाल हैं। कई पर्वतीय क्षेत्रों से ओलावृष्टि की भी खबरें आ रही हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। पहाड़ों में बर्फबारी के आसार अभी भी बरकरार हैं, जिससे ठंडी हवाएं मैदानों की ओर आ रही हैं।

चारधाम यात्रा मार्ग पर धूप-छांव का खेल जारी

बदरीनाथ, केदारनाथ सहित चारधाम और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिनभर धूप और बादलों की आंख-मिचौनी चलती रही। इन क्षेत्रों में वर्षा और बर्फबारी की संभावना लगातार बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक कम दर्ज किया गया है। वहीं, न्यूनतम तापमान में भी 2 से 6 डिग्री तक की गिरावट देखी जा रही है, जो मई के हिसाब से असामान्य है।

अगले कुछ दिनों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों तक मौसम का यह मिजाज इसी प्रकार बना रहेगा। ज्यादातर क्षेत्रों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार हैं। विशेष रूप से उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने, अंधड़ चलने और आकाशीय बिजली चमकने की प्रबल संभावना है। यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मई में सर्द रातों ने तोड़ा रिकॉर्ड

देहरादून और आसपास के इलाकों में दिन के समय सुहावना मौसम बना हुआ है, लेकिन रातें अत्यधिक सर्द हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण इस बार गर्मी की शुरुआत देरी से हुई है। दून के न्यूनतम तापमान में आई कमी ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को प्रभावित किया है। पर्यटकों के लिए यह मौसम आनंददायक हो सकता है, लेकिन खेती और स्वास्थ्य के लिहाज से यह बार-बार होने वाला बदलाव चिंता का विषय बना हुआ है।

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