मंडी में वन विभाग के अफसरों की तानाशाही पर कोर्ट का हथौड़ा, बेकसूर गरीब को रुलाने की मिली इतनी बड़ी सजा

Himachal News: सरकारी तंत्र जब अपनी ताकत के नशे में आम आदमी को प्रताड़ित करने पर उतर आता है, तो न्यायपालिका ही आखिरी उम्मीद बचती है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में अदालत ने वन विभाग की मनमानी और तानाशाही पर करारा प्रहार किया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (कोर्ट एक) ने विभाग की कार्यप्रणाली को सनक भरा बताते हुए एक गरीब ग्रामीण को 74,020 रुपये का हर्जाना देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि सरकारी अफसर खुद को जज समझने की भूल न करें। इस हर्जाने पर मुकदमा दायर करने की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा।

अधिकारियों ने जबरन रुकवाया था पुश्तैनी घर का काम

यह पूरा मामला साल 2012 का है। बल्ह उपमंडल के बाग गांव के रहने वाले धनी राम अपनी पुश्तैनी जमीन पर घर बना रहे थे। 17 जुलाई 2012 को वन विभाग के रेंज ऑफिसर और फॉरेस्ट गार्ड अचानक मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दावा किया कि यह घर वन विभाग की जमीन पर बन रहा है। अधिकारियों ने अपनी ताकत का रौब दिखाते हुए तुरंत निर्माण कार्य रुकवा दिया।

गरीब के औजार छीने और अवैध जुर्माना भी वसूला

वन विभाग की ज्यादती केवल काम रुकवाने तक सीमित नहीं रही। अधिकारियों ने वहां काम कर रहे मिस्त्रियों के बेलचे, कुदाल और गैंती जैसे औजार भी जब्त कर लिए। इसके अलावा, धनी राम से कथित नुकसान के नाम पर पांच हजार रुपये भी वसूल लिए गए। हैरानी की बात यह है कि इस वसूली की रसीद भी पीड़ित को काफी दिनों बाद दी गई।

निशानदेही ने खोली वन विभाग के झूठ की पोल

इस खुले अन्याय के बाद धनी राम ने हार नहीं मानी। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को बुलाया और अपनी जमीन की निशानदेही करवाई। सरकारी जांच में यह स्पष्ट हो गया कि धनी राम का घर पूरी तरह से उनकी अपनी निजी जमीन पर ही बन रहा था। सच्चाई सामने आने के बावजूद वन विभाग ने उनके जब्त औजार फरवरी 2013 तक वापस नहीं किए।

कोर्ट ने माना, बाबू खुद ही बन बैठे थे जज

निचली अदालत ने पहले इस मामले में केवल 14,020 रुपये का हर्जाना तय किया था। धनी राम ने इस फैसले को नाकाफी मानते हुए जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। अपील पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने बिना किसी सिविल कोर्ट के खुद ही स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। एक गरीब व्यक्ति का काम रोकना और औजार जब्त करना गंभीर मानसिक प्रताड़ना है।

मानसिक प्रताड़ना और नुकसान का मिलेगा पूरा हर्जाना

बरसात के मौसम में काम रुकने के कारण पीड़ित की निर्माण सामग्री और मिट्टी बह गई थी, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने हर्जाने की राशि बढ़ाकर 74,020 रुपये कर दी। इसमें अवैध वसूली की रकम, जब्त औजारों का नुकसान, 35 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना, 15 हजार सामग्री का नुकसान और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च शामिल है।

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