Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में संचारी रोगों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एक अप्रैल से शुरू हुआ संचारी रोग नियंत्रण अभियान आधिकारिक तौर पर शुक्रवार को समाप्त होना था, लेकिन अधिकारियों ने इसकी समय-सीमा 15 दिन और बढ़ा दी है। अब यह अभियान 15 मई तक सक्रिय रहेगा। जिला सर्विलांस अधिकारी आरके गुप्ता ने बताया कि मौसम में लगातार हो रहे बदलावों के कारण बुखार के मरीजों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है।
घर-घर जाकर होगी डेंगू और मलेरिया की जांच
अभियान की अवधि बढ़ने के साथ ही अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें अधिक सक्रियता से काम करेंगी। अब बुखार से पीड़ित लोगों को अस्पताल जाने का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी खुद घर-घर जाकर डेंगू और मलेरिया की जांच करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य संक्रामक बीमारियों को फैलने से पहले ही रोकना है। विशेष रूप से उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां जलभराव या गंदगी के कारण मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक बनी रहती है।
दस्तक अभियान के तहत 9 लाख घरों का सर्वे पूरा
अभियान के दूसरे चरण में ‘दस्तक अभियान’ के जरिए बीमार लोगों का व्यापक सर्वे किया जा रहा है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धारित 12 लाख घरों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 9 लाख घरों का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। शेष बचे 3 लाख घरों को कवर करने के लिए ही समय-सीमा का विस्तार किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस अतिरिक्त समय में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
पहली बार बनाई जा रही है डिजिटल आभा आईडी
इस वर्ष के अभियान में एक नया और महत्वपूर्ण कदम जोड़ा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें सर्वे के साथ-साथ नागरिकों की ‘आभा आईडी’ (Ayushman Bharat Health Account) बनाने का काम भी कर रही हैं। इससे मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। सरकार का प्रयास है कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे रोगों की रोकथाम के साथ-साथ लोगों को डिजिटल हेल्थ ईकोसिस्टम से भी जोड़ा जाए। इसके लिए क्षेत्रवार एक हजार से अधिक विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
बढ़ते मामलों को देखते हुए शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
हर साल चलाए जाने वाले इन अभियानों के बावजूद डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार विभाग अधिक सतर्कता बरत रहा है। दस्तक अभियान की फाइनल रिपोर्ट तैयार करने के लिए पांच दिन का समय तय किया गया है, जिसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्री-मानसून की बारिश के कारण पैदा हुए हालात को देखते हुए यह 15 दिनों का विस्तार काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।


