Saharanpur News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान जनपद सहारनपुर में किसान अब परंपरागत खेती को अलविदा कह रहे हैं। वे व्यवसायिक खेती के तौर पर आकर्षक, सुगंधित और कीमती फूलों की खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में भारी इजाफा हो रहा है।
वर्तमान में जिले के करीब 60 से 65 प्रगतिशील किसान लगभग 450 हेक्टेयर भूमि पर बड़े स्तर पर फूलों की मनमोहक खेती कर रहे हैं। इस आधुनिक खेती से किसान प्रति एकड़ आठ से नौ लाख रूपए की शानदार शुद्ध आय बेहद आसानी से कमा रहे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह ने बताया कि फूलों की इस आधुनिक खेती पर आने वाली कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार की तरफ से सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। शुरुआती दौर में एक-दो एकड़ भूमि पर करीब 50-60 लाख रूपए की लागत आती है।
लागत आधी और मुनाफा दोगुना, बैंक भी दे रहे लोन
इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक किसानों को आसानी से लोन भी उपलब्ध कराते हैं। सहारनपुर में किसानों ने साल 2017 में महज 95 हेक्टेयर रकबे से फूलों की खेती की शुरूआत की थी, जो आज 2026 में बढ़कर 450 हेक्टेयर के पार पहुंच चुकी है।
सहारनपुर में उत्पादित टच गुलाब, जरबेरा और कारनेशन जैसे बेसकीमती फूल दिल्ली की प्रसिद्ध गाजीपुर मंड़ी और देहरादून में बहुत ऊंचे दामों पर बिकते हैं। फूलों की उत्तम खेती के लिए दोमट मिट्टी को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सबसे अच्छा और उपजाऊ माना जाता है।
इस विशिष्ट भूमि का पीएच मान 7 से 7.5 के बीच होना फूलों की पैदावार के लिए सबसे अनुकूल होता है। इसमें रासायनिक कीटनाशकों और महंगी दवाओं पर बेहद कम खर्च होता है, जिससे खेती की कुल लागत में काफी कमी आती है।
देवताओं के फूल कारनेशन से महिला किसानों को भी लाभ
बेहट क्षेत्र के गुन्ना गांव निवासी 62 वर्षीय किसान राजेंद्र पुंडीर ने बताया कि कारनेशन फूल की महक लौंग जैसी होती है। इसे ‘देवताओं का फूल’ भी कहा जाता है, जो चार-पांच दिनों तक बिल्कुल ताजा रहता है। त्योहारों और शादियों में इसकी भारी मांग रहती है।
गांव आलमपुर मुजफ्फराबाद की महिला किसान मीरा सैनी भी चार एकड़ भूमि पर जरबेरा और गुलाब की सफल खेती कर मिसाल पेश कर रही हैं। वहीं पिरड़ गांव के भोला सैनी ने गन्ने की खेती पूरी तरह छोड़कर अपने सात बीघा खेत में फूलों की रोपाई कर दी है।
फूलों के एक पौधे की कीमत 40-42 रूपए होती है और एक एकड़ में 25 हजार पौधे लगते हैं। यह फसल पूरी तरह बारहमासी है। इसका एक पौधा एक बार लगाने के बाद आठ-नौ साल तक लगातार बेहतरीन और भरपूर पैदावार देता रहता है।
आरजेडी सांसद ने राम मंदिर ट्रस्ट को भेजा लीगल नोटिस
Ayodhya News: इसी बीच एक अन्य बड़ी खबर में, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से एक कानूनी नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
सांसद सुधाकर सिंह ने अपने इस लीगल नोटिस के जरिए राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले कुल दान की जानकारी मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने उन सरकारी व निजी निधियों के व्यय (खर्च) के बारे में भी बिंदुवार विस्तृत ब्योरा देने की मांग की है।
Ajay Mishra

