Mumbai News: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों के खिलाफ इस्तेमाल की गई ‘गाली’ का अनोखा बचाव किया है। उन्होंने कहा कि दल छोड़ने वाले नेताओं के लिए प्रयुक्त शब्द मराठी राजनीतिक संवाद में पूरी तरह सामान्य हैं।
संजय राउत ने दलील दी कि उनके बयानों का सही संदर्भ समझना बेहद जरूरी है। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब राउत ने इस तरह की तीखी भाषा का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से किया हो। इससे पहले भी वे कई बार अपने बयानों से विवाद खड़ा कर चुके हैं।
लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने पीएम मोदी की तुलना औरंगजेब से कर दी थी। उन्होंने कहा था कि दोनों का जन्मस्थान एक ही होने की वजह से दोनों की सोच एक जैसी है। उनके इस विवादित बयान पर देश भर में काफी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
पीएम मोदी ने तब कहा था कि यह 104वां अवसर है जब राउत ने उन्हें अपशब्द कहे हैं। एक हालिया बातचीत के दौरान राउत ने सफाई दी कि उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि किस मंच पर कैसी भाषा बोलनी चाहिए। उन्होंने संसद में ऐसी भाषा न बोलने का दावा किया।
सामने वाला जो समझे वही भाषा बोलनी पड़ती है
संजय राउत ने अपने रुख पर अड़े रहते हुए कहा कि राजनीति में कई बार ऐसी परिस्थितियां अचानक पैदा हो जाती हैं। वहां जनता की गहरी नाराजगी और भावनाओं को सीधे कड़े शब्दों में व्यक्त करना ही पड़ता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
उनके मुताबिक बातचीत का तरीका अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि सामने वाला व्यक्ति किस स्तर की भाषा समझता है। उन्होंने मर्यादा बनाए रखने की बात तो स्वीकार की, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रमों पर तीखी प्रतिक्रिया को भी पूरी तरह जायज ठहराया।
राउत ने पार्टी से गद्दारी करने वाले नेताओं पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत वित्तीय लाभ के लिए अपनी राजनीतिक निष्ठा रातों-रात बदल ली। ऐसे लोगों को समाज में कभी सम्मान नहीं दिया जा सकता है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, ‘अगर कोई व्यक्ति 15 करोड़ रुपये लेकर अपनी पुरानी पार्टी छोड़ देता है, तो उसके बारे में क्या कहा जाए? क्या हम सब मिलकर ऐसे भ्रष्ट लोगों पर फूलों की बारिश करें?’ इस बयान से विवाद और भड़क गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में जारी है तीखा आरोप-प्रत्यारोप
महाराष्ट्र में शिवसेना के ऐतिहासिक विभाजन के बाद से ही दोनों गुटों में बयानबाजी लगातार तेज है। उद्धव ठाकरे कैंप और एकनाथ शिंदे कैंप के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर लंबे समय से चल रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
दोनों ही गुट एक-दूसरे पर राजनीतिक सिद्धांतों से समझौता करने और सत्ता सुख के लिए फैसले लेने के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। संजय राउत का यह ताजा बयान भी ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में वफादारी पर नई जंग छिड़ गई है।
Author: Harikarishan Sharma


