Prayagraj News: संगम नगरी प्रयागराज में पिछले पांच वर्षों के दौरान कैंसर रोगियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। इनमें सबसे ज्यादा मामले मुंह के कैंसर के सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के नए आंकड़ों के अनुसार अन्य कैंसर के मुकाबले माउथ कैंसर के मामलों में 12 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
अस्पताल की रिपोर्ट बताती है कि पांच साल पहले तक कुल कैंसर मरीजों में सिर्फ 20 प्रतिशत ही माउथ कैंसर से पीड़ित थे। लेकिन अब यह चिंताजनक आंकड़ा बढ़कर 30 से 32 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अगर लोग अब भी जागरूक नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति बेहद भयावह हो सकती है।
जानिए किस उम्र के लोग हो रहे सबसे ज्यादा शिकार
तंबाकू का लगातार सेवन करने वाले लोगों में माउथ कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। कमला नेहरू मेमोरियल कैंसर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक माउथ कैंसर के अधिकांश मरीजों की उम्र 40 से 55 साल के बीच होती है। इस उम्र के लोगों में गुटखा और तंबाकू की लत ज्यादा देखी जा रही है।
कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल आने वाले मरीजों में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग एडवांस स्टेज पर होते हैं। यही बड़ा कारण है कि माउथ कैंसर के मरीजों में रिकवरी रेट बहुत कम होता है। आखिरी स्टेज में पहुंचने के कारण केवल 30 से 40 प्रतिशत मरीज ही ठीक हो पाते हैं।
शुरुआती लक्षणों में इस जानलेवा बीमारी का पता नहीं चल पाता है। यदि मरीज पहले चरण में ही सही डॉक्टर से इलाज शुरू करवा दें, तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। अस्पताल से शुरुआती स्टेज वाले कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर वापस लौटे हैं।
आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा माउथ कैंसर के पीड़ित मरीज ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं। गांवों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को लेकर जागरूकता का बहुत बड़ा अभाव है। सही समय पर जानकारी न मिल पाने के कारण ग्रामीण मरीज समय पर बड़े अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं।
तंबाकू के खिलाफ इस साल की विशेष थीम
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर इस बार एक खास मुहिम चलाई जा रही है। इस साल की थीम ‘आकर्षण का पर्दाफाश: निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला’ रखी गई है। कंपनियां युवाओं को लुभाने के लिए बेहद आकर्षक पैकेट में तंबाकू उत्पाद बेचती हैं, जिनका कई बड़े सेलिब्रिटी भी विज्ञापन करते हैं।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनिया तिवारी ने बताया कि तंबाकू से सिर्फ माउथ कैंसर ही नहीं होता। इसके नियमित सेवन से हार्ट अटैक, फेफड़े का कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक और पैरालिसिस का खतरा भी बढ़ता है। इसके अलावा पेट का कैंसर, खाने की नली का कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां भी घेर लेती हैं।
जानिए सेहत के लिए कितनी घातक है तंबाकू
तंबाकू और इसके जहरीले धुएं में 7,000 से अधिक हानिकारक रासायनिक पदार्थ मौजूद होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें से कम से कम 70 रसायन सीधे तौर पर शरीर में कैंसर का कारण बनते हैं। तंबाकू में मौजूद निकोटीन एक ऐसा नशीला पदार्थ है जो हृदय गति और रक्तचाप को तेजी से बढ़ाता है।
इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला टार फेफड़ों में जमा होकर श्वसन तंत्र को पूरी तरह चोक कर देता है। तंबाकू में कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस भी होती है, जो खून में ऑक्सीजन की मात्रा घटाती है। इसमें चूहे मारने की दवा में इस्तेमाल होने वाला आर्सेनिक और फॉर्मेल्डिहाइड भी पाया जाता है।
तंबाकू उत्पादों में हाइड्रोजन साइनाइड और अमोनिया जैसे घातक केमिकल भी मिलाए जाते हैं। अमोनिया रसायन शरीर के भीतर निकोटीन के अवशोषण को बहुत तेज कर देता है। यही कारण है कि लोगों को बहुत जल्दी इसकी लत लग जाती है और वे चाहकर भी इसे छोड़ नहीं पाते हैं।
Author: Asha Thakur

