Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में मनरेगा योजना के तहत मजदूरों की हाजिरी में बड़े घोटाले की बात सामने आई है। बस्ती जिले में मनरेगा ऐप में सेंधमारी कर फर्जी तरीके से उपस्थिति दर्ज करने का गिरोह पकड़ा गया था। अब इस तकनीकी महाघोटाले की आंच बेल्हा तक पहुंच चुकी है।
क्लोन ऐप और गलत फोटो से लगाई जा रही थी हाजिरी
सरकारी सिस्टम को धोखा देने के लिए शातिर तत्वों ने नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप का तोड़ निकाल लिया। इस गिरोह ने ऐप की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर उसका एक नकली क्लोन ऐप तैयार किया। इसके बाद वे गलत फोटो अपलोड करके घर बैठे ही मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगा रहे थे।
वर्तमान में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने नया एआई-आधारित फोटो सिस्टम और ई-केवाईसी तकनीक लागू की है। इसके बावजूद भ्रष्ट कर्मचारियों ने इसमें सेंध लगाने की कोशिश की। प्रतापगढ़ जिले में कुल 13 हजार 386 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं, जिनके बजट पर डाका डाला जा रहा था।
ब्लॉकवार आंकड़ों को देखें तो कुंडा में सबसे ज्यादा 2,093 मजदूर काम कर रहे हैं। इसके अलावा बाबागंज में 1,544, आसपुर देवसरा में 1,252, बिहार में 1,456, रामपुर संग्रामगढ़ में 904 और संडवा चंद्रिका में 817 मजदूर हैं। इन सभी जगहों के मास्टर रोल की सघन जांच अब शुरू कर दी गई है।
प्रभारी डीसी मनरेगा ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश
घोटाले पर रोक लगाने के लिए विभाग ने अब दिन में दो बार लाइव लोकेशन के साथ उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। रोजगार सेवक सीधे कार्यस्थल से ही डेटा अपलोड कर रहे हैं। प्रभारी डीसी मनरेगा और परियोजना निदेशक दयाराम यादव ने बताया कि इस डिजिटल धांधली की विस्तृत जांच जारी है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि सरकारी बजट का बंदरबांट करने वाले किसी भी तकनीकी अपराधी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने वाले रोजगार सेवकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इस आदेश के बाद से पूरे महकमे में भारी खलबली मची हुई है।
पांच साल पहले भी कालाकांकर ब्लॉक में गिरी थी गाज
जिले में मनरेगा घोटाला कोई नया मामला नहीं है। ठीक पांच साल पहले भी शासन की एक उच्चस्तरीय टीम ने प्रतापगढ़ में छापेमारी की थी। उस समय टीम ने कालाकांकर ब्लॉक के कई गांवों में औचक स्थलीय निरीक्षण किया था, जहां कागजों पर चल रहे विकास कार्यों की पोल खुली थी।
उस पुरानी कार्रवाई के दौरान दो रोजगार सेवकों सहित तीन मुख्य कर्मचारियों को सस्पेंड कर रिकवरी के आदेश दिए गए थे। अब एक बार फिर नए डिजिटल और हाईटेक तरीके से सरकारी खजाने को चूना लगाने का खेल शुरू हो गया था, जिसे रोकने के लिए प्रशासन सख्त हो गया है।
Author: Manoj Patnaik

