एमसीडी में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी एक और जान: रिश्वतखोरी के मकड़जाल ने कर्मचारी को आत्महत्या के लिए किया मजबूर!

Delhi News: भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा दिल्ली नगर निगम (MCD) अब न केवल अनियमितताओं का अड्डा बन गया है, बल्कि अपने ही कर्मचारियों के लिए मानसिक प्रताड़ना का केंद्र भी साबित हो रहा है। शाहदरा उत्तरी जोन में निलंबित एएसआई राजकुमार सोलंकी की आत्महत्या ने इस सड़ चुके तंत्र की खौफनाक सच्चाई उजागर कर दी है। जहां एक ओर निगम के आला अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर के कर्मचारी सिस्टम के दबाव और शोषण से टूटकर मौत को गले लगा रहे हैं।

सीबीआई की कार्रवाई और कर्नल अभिषेक मिश्रा की गिरफ्तारी

नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले माह 30 मार्च को सीबीआई ने शाहदरा उत्तरी जोन के तत्कालीन उपायुक्त कर्नल अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार किया था। उनके साथ डेम्स विभाग के प्रशासनिक अधिकारी दिव्यांशु गौतम को भी रिश्वतखोरी के मामले में दबोचा गया। इन पर आरोप था कि इन्होंने निगम के ही एक निलंबित कर्मचारी की बहाली के बदले चार लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने इन्हें 75 हजार रुपये की पहली किस्त लेते हुए गिरफ्तार किया था।

राजकुमार सोलंकी की मौत और बहाली के लिए रिश्वत का खेल

मृतक राजकुमार सोलंकी के भाई महेंद्र ने निगम प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि राजकुमार को सफाई की एक मामूली शिकायत पर निलंबित कर दिया गया था। बहाली के लिए उससे भी लाखों रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। पुलिस के अनुसार, राजकुमार और गिरफ्तार प्रशासनिक अधिकारी दोनों डेम्स विभाग (पर्यावरण प्रबंधन सेवा विभाग) से जुड़े थे। अब पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या राजकुमार की आत्महत्या के पीछे भी इन्हीं गिरफ्तार अधिकारियों का हाथ था।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर बिल भुगतान तक हर जगह वसूली

नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इस पर पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, बिल्डिंग का नक्शा पास कराने से लेकर ठेकेदारों के बिल पास कराने तक, हर कदम पर रिश्वत का बोलबाला है। यहां तक कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे बुनियादी दस्तावेजों के लिए भी आम जनता और कर्मचारियों से पैसे वसूले जाते हैं। पिछले दिनों शाहदरा दक्षिणी जोन में एक सहायक अभियंता को ठेकेदार से बिल भुगतान के बदले 18 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया था।

रिश्वतखोरी की क्रोनोलॉजी: एमसीडी में गिरफ्तारियों का सिलसिला

नगर निगम में भ्रष्टाचार का ग्राफ पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़ा है, जिसका प्रमाण सीबीआई द्वारा की गई लगातार गिरफ्तारियां हैं:

  • 31 मार्च 2026: शाहदरा उत्तरी जोन में उपायुक्त और प्रशासनिक अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार।
  • 22 मार्च 2026: शाहदरा दक्षिणी जोन के सहायक अभियंता 18 हजार रुपये लेते पकड़े गए।
  • 25 दिसंबर 2025: शाहदरा दक्षिणी जोन में सहायक अभियंता 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार।
  • 13 नवंबर 2025: नजफगढ़ जोन में तैनात जेई को 25 लाख रुपये की रिकॉर्ड रिश्वत लेते पकड़ा गया।
  • 26 नवंबर 2024: शाहदरा उत्तरी जोन के लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर की रिश्वत मामले में गिरफ्तारी।
    इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि जब तक निगम के उच्च नेतृत्व द्वारा सख्त सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह खूनी खेल जारी रहेगा।

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