चुनाव से पहले मायावती का बड़ा दांव: तीन कद्दावर नेताओं की छुट्टी, पश्चिमी यूपी में बसपा की टेंशन बढ़ी

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस कार्रवाई से पार्टी में उथल-पुथल मच गई है। बर्खास्त किए गए नेताओं की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत पकड़ थी। अब बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं में असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं।

कांशीराम के करीबी समेत तीन नेता बाहर

मायावती ने धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज रैन को पार्टी से निकाल दिया है। धर्मवीर अशोक बसपा संस्थापक कांशीराम के बेहद करीबी साथियों में गिने जाते थे। मायावती ने उन्हें कई राज्यों की बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। पश्चिमी यूपी समेत कई इलाकों में उनकी अच्छी पकड़ और लोकप्रियता थी।

वहीं जयप्रकाश काफी समय बाद बसपा में वापस लौटे थे। वे पश्चिमी यूपी में युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम कर रहे थे। उन्हें केरल चुनाव की जिम्मेदारी भी मिली थी। लेकिन पश्चिमी यूपी के संगठन में दखलअंदाजी का आरोप लगा। एक विवाद के बाद उन पर कार्रवाई हुई। सरफराज रैन भी संगठन में सक्रिय बड़े चेहरा थे।

कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष, बूथ स्तर पर असर

बसपा सूत्रों के मुताबिक इन तीनों नेताओं का अचानक निकाला जाना कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रहा है। जब चुनाव सिर पर है तब यह फैसला समझ से परे माना जा रहा है। ये सभी नेता पश्चिमी यूपी में जमीनी स्तर पर मजबूत माने जाते थे। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं में इस कार्रवाई को लेकर खासी नाराजगी है।

पार्टी पुराने नेताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रही थी। लेकिन इन बर्खास्तगियों से वह प्रयास भी प्रभावित हो सकता है। कहा जा रहा है कि कुछ नेताओं की शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। खासकर जयप्रकाश पर अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप प्रमुख वजह बना।

पश्चिमी यूपी की सीटों पर मंडराया खतरा

जानकारों का मानना है कि इस फैसले का नुकसान बसपा को आगामी चुनावों में उठाना पड़ सकता है। इन तीनों नेताओं का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खासा प्रभाव था। इनकी अनुपस्थिति से पार्टी की चुनावी रणनीति कमजोर पड़ सकती है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को साधना पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।

बसपा अन्य दलों से पहले ही कई जिलों में प्रभारी इंचार्ज नियुक्त कर चुकी है। टिकट वितरण की प्रक्रिया भी जोरों पर है। ऐसे में इन तीनों की कमी पार्टी की जमीनी ताकत को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर देखने को मिलेगा।

क्या आगे और बड़े फैसले लेंगी मायावती?

पार्टी के अंदर अब यह चर्चा जोरों पर है कि आगे क्या होगा। कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस तरह के और फैसले आएंगे। कई लोग स्थिति को संभालने के लिए नए कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन मायावती का इशारा साफ है कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है।

फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हैं। ऐसे में बसपा के सामने खुद को फिर से मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। पश्चिमी यूपी पर पारंपरिक रूप से बसपा की अच्छी पकड़ रही है। लेकिन इस घटनाक्रम ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। बहुजन समाज पार्टी की तैयारियों पर अब यह फैसला कितना भारी पड़ता है, यह देखना अहम होगा।

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