New Delhi: देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। तेल कंपनियों ने आज एक बार फिर ईंधन के दामों में ₹2.71 प्रति लीटर का भारी इजाफा कर दिया है। हालांकि इस महंगाई के बीच एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।
बीते दस दिनों में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
देशभर में ईंधन की बढ़ती कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले महज 10 दिनों के भीतर आम उपभोक्ताओं पर यह चौथी बड़ी मार पड़ी है। इससे पहले कंपनियों ने 15 मई को लगभग ₹3 की भारी बढ़ोतरी की थी। इसके बाद भी लगातार दाम बढ़ाए गए।
कंपनियों ने इसके बाद 19 मई को करीब 90 पैसे और फिर 23 मई को दोबारा 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया था। आज 25 मई को फिर से बड़ा उछाल आने से बाजार का बजट बिगड़ गया है। राहत की बात बस यह है कि आज घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
महानगरों में रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर की नई दरें
देश की तेल कंपनियों ने घरेलू कुकिंग गैस के दामों को पूरी तरह स्थिर रखा है। वर्तमान में दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर ₹913.0 और कमर्शियल सिलेंडर ₹3071.5 में मिल रहा है। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में घरेलू सिलेंडर ₹912.5 और कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹3024.0 की दर पर उपलब्ध है।
कोलकाता में उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर के लिए ₹939.0 और कमर्शियल के लिए ₹3202.5 चुकाने होंगे। दक्षिण के प्रमुख शहर बेंगलुरु में घरेलू सिलेंडर का भाव ₹915.5 और कमर्शियल का ₹3152.0 है। वहीं चेन्नई में रसोई गैस ₹928.5 और कमर्शियल सिलेंडर ₹3237.0 के स्तर पर स्थिर है।
उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में एलपीजी के ताजा आंकड़े
राजस्थान की राजधानी जयपुर में घरेलू गैस की कीमत ₹916.5 और व्यवसायिक उपयोग वाले सिलेंडर की कीमत ₹3099.0 बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रसोई गैस सिलेंडर ₹950.5 और कमर्शियल सिलेंडर ₹3194.0 में मिल रहा है। इन बड़े शहरों में दाम स्थिर होने से राहत है।
बिहार की राजधानी पटना में घरेलू सिलेंडर सबसे महंगा यानी ₹1002.5 के स्तर पर बना हुआ है। वहां कमर्शियल सिलेंडर की दर ₹3347.0 दर्ज की गई। मध्य प्रदेश के भोपाल में उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर के लिए ₹918.5 और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के लिए ₹3077.0 देने होंगे।
मार्च के बाद नहीं बढ़ी घरेलू कुकिंग गैस की कीमतें
देश में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम आखिरी बार 7 मार्च 2026 को ₹60 बढ़ाए गए थे। उसके बाद से तेल कंपनियों ने रसोई गैस की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। आम जनता को राहत देने का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी भारी उथल-पुथल के बावजूद लिया गया है।
दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल और एलपीजी का बाजार लगातार अस्थिर बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मुख्य शिपिंग रूट पर सप्लाई रुकने की आशंका गहरा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क मूल्यों में लगातार उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
सरकारी तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं घाटे का बड़ा बोझ
घरेलू गैस के विपरीत कमर्शियल सेक्टर को इस महंगाई का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ा है। मई महीने की पहली तारीख को ही 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में ₹900 से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि शुरुआती झटके के बाद कमर्शियल दरें भी काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण घरेलू बाजार में दबाव बढ़ा है। लेकिन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां नुकसान खुद झेल रही हैं। वे आम जनता को बड़ी राहत देने के लिए इस घाटे का कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही हैं।
Author: Rajesh Kumar

