पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एनआईए का बड़ा खुलासा, अमेरिकी कैमरे और चीनी कनेक्शन ने उड़ाई सुरक्षा एजेंसियों की नींद

Jammu and Kashmir News: राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पहलगाम आतंकी हमले की तफ्तीश में एक बेहद चौंकाने वाला सुराग हासिल किया है। इस नए खुलासे ने आतंकवादियों को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनआईए अब लश्कर-ए-तैयबा के इस खतरनाक ग्लोबल नेटवर्क को पूरी तरह खंगालने में जुट गई है।

सुरक्षा बलों ने पिछले साल डाचीगाम के घने जंगलों में मुठभेड़ के दौरान कुछ खूंखार आतंकियों को मार गिराया था। एनआईए को मारे गए आतंकियों के पास से एक अत्याधुनिक अमेरिकी गोप्रो कैमरा मिला है। जांच में सामने आया कि यह डिजिटल डिवाइस आधिकारिक रूप से अमेरिका से सीधे चीन भेजी गई थी।

यही आतंकी 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के प्रसिद्ध बैसरन मैदान में हुए भीषण नरसंहार में सीधे शामिल थे। इस बर्बर हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकांश सैलानी शामिल थे। आतंकी इस हाई-टेक कैमरे का इस्तेमाल खूनी हमले की लाइव रिकॉर्डिंग करने के लिए कर रहे थे।

चीन से पाकिस्तान पहुंचा अमेरिकी तकनीक का कैमरा

एनआईए की तकनीकी टीम ने जब डिवाइस की गहन जांच की, तो इसके तार चीन के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़े मिले। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह डिवाइस चीन से पहले पाकिस्तान पहुंची। इसके बाद इसे कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक बेहद सुरक्षित तरीके से पहुंचाया गया।

सुरक्षा एजेंसियां इस गंभीर पहलू की भी जांच कर रही हैं कि कहीं इसे पाकिस्तानी सेना ने तो नहीं खरीदा था। भारत और चीन के बीच आपसी कानूनी सहायता संधि नहीं है। इस वजह से एनआईए विदेश मंत्रालय के सहयोग से कूटनीतिक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

हमले के बाद शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन सिंदूर’

पहलगाम में पर्यटकों पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था। सेना ने पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस बड़े ऑपरेशन में लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकाने पूरी तरह तबाह हुए थे।

बैसरन हमले के बाद तीनों आतंकी स्थानीय जंगलों का फायदा उठाकर भाग निकले थे। बाद में विशेष सैन्य बलों ने डाचीगाम के जंगलों में फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हमजा अफगानी को मार गिराया। मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों को चीनी मूल की खतरनाक एके-47 राइफलें भी बरामद हुई थीं।

एनआईए ने स्थानीय मददगार बशीर अहमद और परवेज अहमद के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। इन दोनों ने हमले से पहले आतंकियों को कंबल, तिरपाल और राशन जैसी रसद सामग्री पहुंचाई थी। डाचीगाम से मिले कंबल के डीएनए मिलान से बशीर की संलिप्तता पूरी तरह सिद्ध हुई है।

इलाके के कई सीसीटीवी कैमरे खराब होने के कारण जांच टीम को शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। एनआईए ने लश्कर कमांडर साजिद जट्ट के खिलाफ भी शिकंजा कसा है। एजेंसी अब इस पूरे टेरर मॉड्यूल की फंडिंग और वैश्विक लॉजिस्टिक चेन को पूरी तरह खंगाल रही है।

Author: Muzaffar Bhat

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