Ladakh News: लेह के पास ऊंचाई वाले तांगस्ते क्षेत्र में भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भयानक हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारी चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गए। सेना ने आज इस घटना की आधिकारिक जानकारी साझा की है।
बुधवार को हुए इस हादसे के वक्त हेलीकॉप्टर को एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर उड़ा रहे थे। उनके साथ तीसरी इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल सचिन मेहता भी सवार थे। अधिकारियों के अनुसार तीनों को मामूली चोटें आई हैं। सेना ने हादसे के असली कारणों की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी शुरू कर दी है।
पुराने पड़ चुके चीता और चेतक बेड़े को हटाएगी भारतीय सेना
इस बीच सैन्य अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना अगले एक-दो साल में अपने पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाना शुरू कर देगी। सेना विमानन कोर के बड़े आधुनिकीकरण अभियान के तहत इन्हें अगले आठ से दस वर्षों में नए हल्के उपयोगिता हेलीकॉप्टरों से पूरी तरह बदल दिया जाएगा।
सेना ने इसके लिए एक खास दोहरी प्रतिस्थापन रणनीति बनाई है। इसके तहत देश में बने हल्के उपयोगिता हेलीकॉप्टरों को सेना में शामिल किया जाएगा। साथ ही आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्थायी तौर पर समान श्रेणी के हेलीकॉप्टरों को पट्टे पर लिया जाएगा। वर्तमान में सेना को करीब 250 नए हेलीकॉप्टरों की सख्त जरूरत है।
सियाचिन ग्लेशियर में तैनात जवानों की लाइफलाइन हैं ये हेलीकॉप्टर
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने रक्षा सेवाओं के लिए कुल 625 चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों का लाइसेंस-उत्पादन किया था। हालांकि कंपनी अब इनका नया निर्माण नहीं करती है। वर्तमान में एचएएल केवल इन पुराने हेलीकॉप्टरों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी संभाल रही है।
ये हेलीकॉप्टर वर्तमान में सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए राशन और रसद पहुंचाने का मुख्य जरिया हैं। हालांकि हाल के वर्षों में हुई कई दुर्घटनाओं ने इन हेलीकॉप्टरों के सुरक्षा रिकॉर्ड पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद से इनकी गहन तकनीकी जांच भी शुरू हो गई है।
पिछले 10-12 वर्षों में 15 से अधिक चीता और चेतक हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुके हैं। इन हादसों में सेना के कई जांबाज पायलटों ने अपनी जान गंवाई है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार वर्तमान बेड़ा पूरी तरह उड़ान भरने योग्य है। यह तकनीकी रूप से कुछ और वर्षों तक सेना की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।
Author: Rigzin Namgyal

