तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा भूचाल, पूर्व भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई शुरू करने जा रहे हैं एक नया रहस्यमयी आंदोलन

Tamil Nadu News: सूबे की सियासत में एक बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई राज्य में एक बिल्कुल नया आंदोलन शुरू करने की बड़ी तैयारी कर रहे हैं।

इस बड़े आंदोलन का मुख्य उद्देश्य समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट करना है। अन्नामलाई इसके जरिए समर्पित स्वयंसेवकों का एक बहुत मजबूत कैडर तैयार करेंगे। इसके बाद वे इन कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से राजनीतिक प्रशिक्षण भी देंगे।

मीडिया सूत्रों के हवाले से आई खबरों ने राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का यह नया दांव विरोधियों के साथ-साथ खुद उनकी पार्टी के भीतर भी कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।

पीएम मोदी की प्रेरणा से चलेगा नया आंदोलन

अन्नामलाई अपने गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ “वी द लीडर्स” के जरिए इस बड़े आंदोलन को गति देंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगले छह महीने तक इस मुहिम को किसी भी नए राजनीतिक दल में बदलने की उनकी कोई योजना नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस पूरी नई मुहिम के मुख्य प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। पूर्व कद्दावर आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने साल 2020 में पुलिस सेवा छोड़कर राजनीति की मुख्यधारा में बेहद धमाकेदार अंदाज में प्रवेश किया था।

उन्होंने साल 2021 में वरिष्ठ नेता एल मुरुगन की जगह तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष की कमान संभाली थी। उन्होंने साल 2025 तक इस पद पर रहते हुए पार्टी का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया। वे अपनी बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं।

आक्रामक शैली ने भाजपा को दिया नया जीवन

तमिलनाडु की जनता अन्नामलाई को एक बेहद स्वच्छंद और मुखर राजनेता के रूप में देखती है। उन्हें दक्षिण भारत के इस अहम राज्य में भाजपा को काफी हद तक पुनर्जीवित करने का सबसे बड़ा श्रेय भी दिया जाता है।

उनकी बेहद आक्रामक राजनीतिक शैली और मीडिया में उनकी मजबूत उपस्थिति ने उन्हें चमका दिया। वे बहुत कम समय में ही दिल्ली में बैठे केंद्रीय भाजपा नेताओं के लिए राज्य की एक सबसे महत्वपूर्ण आवाज बन गए थे।

लेकिन आक्रामक राजनीति के चक्कर में अंततः उन्होंने अपनी तय सीमा पार कर दी थी। सूबे के बड़े नेताओं सीएन अन्नादुराई और जे जयललिता पर उनकी बेहद विवादास्पद टिप्पणियों ने पुरानी सहयोगी पार्टी एआईएडीएमके को नाराज कर दिया था।

गठबंधन टूटने से लगा था भारी चुनावी झटका

इस बड़ी कड़वाहट के परिणामस्वरूप साल 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले दोनों दलों का पुराना और मजबूत गठबंधन टूट गया। चुनाव में अलग-अलग मैदान में उतरीं दोनों ही पार्टियों को बहुत तगड़ा चुनावी झटका लगा था।

गठबंधन टूटने की वजह से दोनों दल राज्य में एक भी सीट जीतने में पूरी तरह असफल रहे थे। इसके विपरीत सत्ताधारी दल डीएमके के नेतृत्व वाले मजबूत मोर्चे ने राज्य की सभी लोकसभा सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी।

अब अन्नामलाई का एनजीओ के जरिए यह नया जमीनी प्रयोग राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। उनके इस कदम से दक्षिण भारत की क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने तय माने जा रहे हैं।

Author: Karthik Srinivasan

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