India News: भारत में अप्रैल की शुरुआत से ही भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर मध्य भारत तक लू चल रही है। ऐसे में लोग बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मॉनसून को लेकर अपना पहला पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग की यह रिपोर्ट लोगों की चिंता बढ़ाने वाली है। इस साल सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
कम बारिश होने का अनुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस साल मॉनसून कमजोर रह सकता है। जून से सितंबर के बीच दीर्घावधि औसत की केवल 92 फीसदी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विज्ञान की भाषा में छियानवे से एक सौ चार प्रतिशत बारिश को सामान्य माना जाता है। बानवे प्रतिशत बारिश सामान्य से कम श्रेणी में आती है। यह स्थिति किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।
अल नीनो का दिखेगा भारी असर
कम बारिश के पीछे मुख्य कारण अल नीनो को माना जा रहा है। यह प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली एक विशेष जलवायु घटना है। अल नीनो भारत में मॉनसून की चाल को कमजोर कर देता है। इसके सक्रिय होने से देश में बादल बनने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप बारिश की मात्रा घट जाती है। यह स्थिति देश के बड़े हिस्से को सूखे की तरफ धकेल सकती है।
राज्यों में सूखे जैसे हालात की आशंका
मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में कम बारिश होने की संभावना है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य बारिश हो सकती है। हिंद महासागर में बनने वाला इंडियन ओशन डाइपोल कुछ राहत दे सकता है। इसका सकारात्मक चरण मॉनसून को मजबूती प्रदान कर सकता है। मौसम विभाग मई के अंत में अपना विस्तृत पूर्वानुमान जारी करेगा। इससे स्थिति और ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।
किसानों और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा दबाव
भारत की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी पूरी तरह से खेती पर निर्भर है। कम बारिश का सीधा असर धान और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों पर पड़ेगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए दूसरे संसाधनों पर निर्भर रहना होगा। फसल उत्पादन घटने से देश में महंगाई बहुत तेजी से बढ़ सकती है। इसका सीधा असर हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। सरकार को अभी से पुख्ता तैयारी करनी होगी।


