अवैध कब्जों और बकायेदारों की अब खैर नहीं! हाईकोर्ट ने इस नगर निगम को दे दी सीधे सजा सुनाने की ताकत

Himachal News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंडी नगर निगम को एक बड़ी ताकत दी है। अब निगम को कई तरह की न्यायिक शक्तियां मिल गई हैं। प्रदेश सरकार की विशेष मांग पर हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला लिया है। इससे नगर निगम से जुड़े मामलों का निपटारा अब काफी तेजी से होगा। लोगों को अब छोटे विवादों के लिए अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इस ऐतिहासिक फैसले से आम जनता को सीधे और त्वरित न्याय मिलेगा।

अतिरिक्त आयुक्त को मिली मजिस्ट्रेट की पावर

मंडी नगर निगम के आयुक्त रोहित राठौर ने इस फैसले की जानकारी दी है। उन्होंने इसे प्रभावी प्रशासन के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। हाईकोर्ट ने निगम के अतिरिक्त आयुक्त विजय कुमार को विशेष शक्तियां दी हैं। उन्हें तत्काल प्रभाव से विशेष न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बनाया गया है। यह अधिकार उन्हें एक साल की अवधि के लिए दिया गया है। अब वह नगर निगम अधिनियम 1984 के तहत मामलों की सुनवाई करेंगे। साथ ही, वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 283 के तहत समरी ट्रायल भी कर सकेंगे।

कलेक्टर के रूप में भी हुई ताजपोशी

राज्य सरकार ने 24 मार्च 2026 को एक और अहम अधिसूचना जारी की थी। हिमाचल के राज्यपाल ने अतिरिक्त आयुक्त को कलेक्टर भी नियुक्त कर दिया है। यह नियुक्ति सार्वजनिक परिसर और भूमि अधिनियम 1971 के तहत की गई है। अब निगम अपनी संपत्तियों से अवैध कब्जे बहुत आसानी से हटा सकेगा। इसके अलावा, रुके हुए भारी भरकम किराए की वसूली भी तेजी से हो सकेगी।

जनता को मिलेगा त्वरित और सुलभ न्याय

आयुक्त रोहित राठौर ने इन दोनों फैसलों को मंडी के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इससे नगर निगम की कानूनी और प्रशासनिक क्षमता में काफी वृद्धि होगी। अब अवैध निर्माण और कब्जों के मामलों में तुरंत सख्त कार्रवाई होगी। बकायेदारों से वसूली की रुकी हुई प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। मंडी के नागरिकों को अब स्थानीय स्तर पर ही सुलभ न्याय प्राप्त हो सकेगा।

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