New Delhi News: भारत में डिजिटल क्रांति अब एक नए और सुरक्षित अध्याय की ओर बढ़ चुकी है। गूगल ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के साथ हाथ मिलाया है। इस साझेदारी के तहत गूगल वॉलेट में आधार-आधारित डिजिटल आईडी सपोर्ट लॉन्च किया गया है। अब आपको हर जगह अपना फिजिकल कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। यह कदम न केवल पहचान की प्रक्रिया को आसान बनाएगा, बल्कि यूजर्स की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को भी पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ा देगा।
वेरिफाएबल क्रेडेंशियल तकनीक: सुरक्षा का नया वैश्विक पैमाना
गूगल का यह नया सिस्टम आधुनिक ‘वेरिफाएबल क्रेडेंशियल’ मॉडल पर आधारित है। यह वर्तमान के पुराने तरीकों की तुलना में काफी ज्यादा उन्नत और सुरक्षित माना जा रहा है। इस फीचर की सबसे बड़ी खूबी इसकी गोपनीयता है। अब आपको पहचान साबित करने के लिए अपना पूरा दस्तावेज दिखाने की मजबूरी नहीं होगी। इसे वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। यह डेटा के गलत इस्तेमाल और चोरी होने की संभावना को पूरी तरह खत्म कर देता है।
प्राइवेसी को मिलेगा बड़ा कवच, छुपा रहेगा पूरा आईडी नंबर
इस फीचर का सबसे व्यावहारिक लाभ प्राइवेसी सुरक्षा में देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, यदि आपको कहीं केवल अपनी उम्र का प्रमाण देना है, तो आप केवल उतनी ही जानकारी साझा कर सकेंगे। इससे आपका पूरा आईडी नंबर, घर का पता और अन्य निजी जानकारी गुप्त रहेगी। यह तकनीक केवल जरूरी जानकारी को ही ‘एक्सपोज’ करती है। इससे नागरिकों का संवेदनशील डेटा सुरक्षित रहता है और वे अपनी पहचान पर पूर्ण नियंत्रण रख सकते हैं।
सिनेमा हॉल से लेकर वीजा आवेदन तक हर जगह मिलेगी राहत
गूगल वॉलेट के इस डिजिटल फीचर का इस्तेमाल कई प्रमुख नागरिक सेवाओं में किया जा सकेगा। PVR INOX जैसे सिनेमाघरों में उम्र के वेरिफिकेशन के लिए अब फिजिकल कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, भारत मैट्रिमोनी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी आप आसानी से अपनी पहचान साबित कर सकेंगे। एटलीस (Atlys) जैसे एप्स पर वीजा आवेदन के दौरान यह सिस्टम जानकारी को ऑटो-फिल कर देगा। मायगेट जैसी हाउसिंग सोसाइटी एप्स पर भी विजिटर वेरिफिकेशन अब पलक झपकते ही हो जाएगा।
डिजिटल इंडिया का वैश्विक विस्तार और भविष्य की योजनाएं
गूगल का यह अभियान केवल भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी सिंगापुर, ब्राजील और ताइवान जैसे देशों में भी डिजिटल आईडी को तेजी से बढ़ावा दे रही है। वहां पासपोर्ट आधारित आईडी को वॉलेट में स्टोर करने की सुविधा पहले ही दी जा रही है। गूगल के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में कई और सरकारी और निजी संस्थान इस तकनीक से जुड़ेंगे। इससे फिजिकल दस्तावेजों को साथ लेकर चलने की बोझिल प्रक्रिया हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।


