हवाई अड्डे से गायब हुए कद्दू और ब्राउनी: दिल्ली पुलिस की जांच पर कोर्ट सख्त, जॉइंट सीपी को दिए दोबारा जांच के आदेश

Delhi News: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दो कुत्तों, ‘कद्दू’ और ‘ब्राउनी’ के रहस्यमय तरीके से गायब होने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणव जोशी ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच को अत्यंत लापरवाह और सतही बताया है। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रांसपोर्ट रेंज) को इस पूरे प्रकरण की नए सिरे से व्यापक जांच करने और रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

जांच में गंभीर खामियां और कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को पूरी तरह नजरअंदाज किया। मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की कि घटना को डेढ़ महीना बीत जाने के बावजूद पुलिस यह भी पता नहीं लगा पाई कि कुत्ते जीवित हैं या नहीं। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई, जो यह सुनिश्चित कर सके कि इन बेजुबानों को आखिर कहां ले जाया गया था।

सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की भूमिका

कोर्ट के समक्ष पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, टर्मिनल-3 के सीसीटीवी फुटेज में एक व्यक्ति कुत्ते को बहला-फुसलाकर वाहन में ले जाते हुए स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जांच में यह व्यक्ति ‘जेके कांट्रैक्टर्स’ से जुड़ा पाया गया है। इसके बावजूद, पुलिस ने संबंधित एजेंसियों या ठेकेदारों से सख्ती से पूछताछ नहीं की। अदालत ने इसे पुलिस की विफलता माना कि आरोपियों की पहचान होने की संभावना के बाद भी कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।

टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3 की घटनाओं के बीच संदिग्ध संबंध

अदालत ने आशंका जताई कि टर्मिनल-1 पर कुत्ते को अमानवीय तरीके से पकड़े जाने की वायरल वीडियो और टर्मिनल-3 की घटना एक ही सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। कोर्ट ने पूर्व में दोनों जगहों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और समन्वित जांच के निर्देश दिए थे, जिनका पालन नहीं किया गया। हैरानी की बात यह है कि जांच अधिकारी ने ठेकेदारों से सवाल पूछने के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही छह पन्नों का प्रश्नपत्र थमा दिया।

लापरवाही की हद: पुलिस रिकॉर्ड में अधिकारियों के नाम भी गायब

अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी रेखांकित किया कि पुलिस ने डायल (DIAL) के जिन अधिकारियों से पूछताछ करने का दावा किया, उनके नाम तक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं। पुलिस की यह कार्यशैली जांच में पारदर्शिता के अभाव को दर्शाती है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें संयुक्त पुलिस आयुक्त को अपनी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।

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