केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल 2026 से बढ़ी न्यूनतम मजदूरी, जानें अब कितनी मिलेगी दिहाड़ी

New Delhi News: केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम मजदूरी की नई दरों की घोषणा कर दी है। ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) में संशोधन के कारण रेलवे, निर्माण, कृषि और सफाई जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की आय में सीधा इजाफा होगा। सरकार का यह कदम बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

महंगाई के अनुपात में भत्तों में इजाफा

मजदूरी में इस बढ़ोतरी का मुख्य आधार कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में आया उछाल है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक इंडेक्स 413.52 से बढ़कर 424.80 के स्तर पर पहुंच गया है। इंडेक्स में दर्ज की गई 11.28 अंकों की यह बढ़त दर्शाती है कि रहन-सहन की लागत में वृद्धि हुई है। इसी अनुपात में सरकार ने मजदूरों के भत्तों (VDA) को संशोधित किया है ताकि उनकी क्रय शक्ति बनी रहे।

सफाई और गोदाम कर्मियों की नई दरें

रेलवे गुड्स शेड, पार्सल ऑफिस और गोदामों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए अब ‘ए’ श्रेणी के शहरों में कुल मजदूरी ₹827 प्रति दिन होगी। इसमें ₹523 बेसिक और ₹304 का भत्ता शामिल है। ‘बी’ श्रेणी के शहरों के लिए यह राशि ₹693 और ‘सी’ श्रेणी के क्षेत्रों के लिए ₹556 निर्धारित की गई है। इस संशोधन से असंगठित क्षेत्र के लाखों परिवारों को सीधा वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा गार्डों के वेतन में भारी बढ़ोतरी

सिक्योरिटी गार्ड्स की श्रेणियों को भी नया वेतनमान दिया गया है। बिना हथियार वाले गार्ड्स को ‘ए’ श्रेणी के शहरों में अब ₹1,008 प्रति दिन मिलेंगे, जबकि हथियार बंद गार्ड्स के लिए यह राशि ₹1,094 तय की गई है। मध्यम श्रेणी (B) के शहरों में बिना हथियार वाले गार्ड्स को ₹918 और हथियार बंद गार्ड्स को ₹1,008 मिलेंगे। ग्रामीण और छोटे शहरों (C) में यह दर क्रमशः ₹781 और ₹918 होगी।

शहरों के वर्गीकरण का आधार

श्रम मंत्रालय ने मजदूरी तय करने के लिए शहरों को तीन श्रेणियों (A, B, और C) में विभाजित किया है। ‘ए’ श्रेणी में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगर शामिल हैं जहाँ जीवन यापन का खर्च अधिक है। ‘बी’ श्रेणी में राज्य की राजधानियाँ और प्रमुख औद्योगिक केंद्र आते हैं, जबकि ‘सी’ श्रेणी में ग्रामीण और छोटे इलाकों को रखा गया है। इस वैज्ञानिक वर्गीकरण से सुनिश्चित होता है कि स्थानीय महंगाई के अनुसार श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक मिले।

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